न्यूज | मगरलोड
उत्तर सिंगपुर के हरदी गांव में वन विभाग की टीम ने 15 अवैध कोयला भट्ठों को सील कर दिया है। परिक्षेत्र अधिकारी आकांक्षा बोरकर के नेतृत्व में मंगलवार शाम हुई इस छापेमारी में मौके से लाखों रुपए की प्रतिबंधित कीमती लकड़ियां और तैयार कोयला जब्त किया गया। लेकिन इस बड़ी कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल वन विभाग की कार्यशैली पर खड़ा हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह अवैध काला कारोबार पिछले 5 सालों से बेखौफ चल रहा था। लेकिन विभागीय अधिकारी इतने लंबे समय तक आंखें मूंदकर क्यों बैठे रहे?
सहायक परिक्षेत्र अधिकारी दिनेश वर्मा के अनुसार, हरदी में बिना किसी वैध लाइसेंस के जंगल के कीमती पेड़ों को काटकर कोयला बनाया जा रहा था। छापेमारी के दौरान 15 भट्ठियों में कोयला सुलगता हुआ पाया गया। भट्ठियों के पास अर्जुन, बबूल, इमली जैसी प्रतिबंधित प्रजातियों की लकड़ी के 19 बड़े ढेर और 59 बोरी तैयार कोयला मिला। भट्ठी संचालक मौके पर कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वनोपज व्यापार विनियमन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। मुख्य स्रोत की जांच करेंगे वन विभाग की टीम ने हरदी में कोयला भट्ठियों को सील कर दिया है। मौके से कई कीमती पेड़ों की लकड़ी मिली है। इसके मुख्य स्रोत की गहन जांच की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि पर्यावरण बोर्ड के नियमों का पालन हो रहा था या नहीं। यदि नियमों के विपरीत भट्ठियों का संचालन पाया गया, तो उन्हें हमेशा के लिए पूरी तरह बंद करा दिया जाएगा। - श्रीकृष्ण जाधव, डीएफओ, धमतरी ^ हरदी के सरपंच मनोहर ध्रुव का कहना है कि उन्हें इस भट्ठी के संचालन की जानकारी नहीं थी। इससे यह रहस्य और गहरा गया है कि इतना बड़ा अवैध नेटवर्क किसकी शह पर छिपकर चल रहा था।