मैनपुर। गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। पांच दिनों से लापता एक ग्रामीण का शव जंगल में पेड़ से लटका मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी कराई। इसके बाद शव को घर ले जाने के लिए परिजनों को मुक्तांजलि वाहन नहीं मिल सका।
परिजनों के मुताबिक, उन्होंने शव वाहन के लिए करीब 2 से 3 घंटे तक इंतजार किया। निजी वाहन की व्यवस्था करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। आखिरकार परिजनों ने लकड़ी की बल्ली के सहारे शव को बांधा और पैदल ही अंतिम संस्कार के लिए निकल पड़े।
इस घटना ने दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शव परिवहन जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पांच दिन से लापता था ग्रामीण
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत बोइरगांव के आश्रित ग्राम बेहराडीह निवासी सुमेर सिंह 28 सितंबर 2026 से लापता थे। परिजन लगातार उनकी तलाश कर रहे थे।
इसी दौरान बरदूला से लगे जंगल में एक व्यक्ति का शव पेड़ से लटके होने की सूचना मिली। जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और शव की पहचान सुमेर सिंह के रूप में की।
सूचना मिलने पर मैनपुर पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने आवश्यक पंचनामा कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पोस्टमार्टम के बाद शुरू हुई दूसरी परेशानी
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद परिजनों के सामने शव को घर तक ले जाने की समस्या खड़ी हो गई।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने शव को घर ले जाने के लिए मुक्तांजलि वाहन की मांग की थी। काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद वाहन उपलब्ध नहीं हुआ। करीब 2 से 3 घंटे इंतजार के बाद निजी वाहन की व्यवस्था करने की कोशिश भी की गई, लेकिन तत्काल कोई वाहन नहीं मिल सका।
लकड़ी की बल्ली के सहारे शव लेकर पैदल निकला परिवार
जब वाहन की व्यवस्था नहीं हो सकी तो परिवार के लोगों ने लकड़ी की एक बल्ली का सहारा लिया। शव को बल्ली से बांधा गया और परिजन उसे लेकर पैदल ही अंतिम संस्कार के लिए निकल पड़े।
इस घटना का दृश्य सामने आने के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाओं और विशेष रूप से दूरस्थ इलाकों में शव परिवहन की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बीएमओ ने बताया- मुक्तांजलि वाहन कुड़ेदादर गया था
मामले में मैनपुर बीएमओ डॉ. गजेंद्र ध्रुव ने बताया कि जिले का मुक्तांजलि वाहन उस समय कुड़ेदादर गया हुआ था, जिसके कारण तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं हो सका।
मैनपुर क्षेत्र में पहले भी उठ चुके हैं सवाल
मैनपुर क्षेत्र में दूरस्थ इलाकों तक स्वास्थ्य और आपातकालीन सुविधाओं की पहुंच को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
मार्च 2026 में एक कमार बुजुर्ग को इलाज के लिए करीब 17 किलोमीटर तक पैदल और खाट के सहारे ले जाने का मामला सामने आया था। अब एक बार फिर कमार जनजाति के बुजुर्ग की मौत के बाद शव को घर तक ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं होने की घटना ने दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और उपलब्धता पर चर्चा तेज कर दी है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद शव को सम्मानजनक तरीके से घर या अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचाना परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में समय पर शव वाहन उपलब्ध नहीं होने की यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी उपलब्धता पर सवाल खड़े करती है।
अब देखने वाली बात होगी कि संबंधित विभाग इस मामले को लेकर क्या कदम उठाता है और दूरस्थ क्षेत्रों में मुक्तांजलि वाहन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।
