सुकमा में नक्सल कमांडर हिड़मा के गांव में अब विकास से नक्सलवाद को मात दिया जा रहा है.
सुकमा: छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों ने एंटी नक्सल ऑपरेशन में कई सफलताएं अर्जित की है. बीते कुछ महीनों में कई खूंखार नक्सली मारे गए हैं. नक्सली नेता बसवराजू से लेकर बालकृष्ण तक का सफाया हो चुका है. अब फोर्स के एक्शन के बाद विकास के जरिए नक्सल प्रभावित इलाकों में नई लकीर खींची जा रही है. दक्षिण बस्तर का पूवर्ती गांव जो नक्सल कमांडर हिड़मा का गांव है पहले इसे नक्सलियों का गढ़ कहा जाता था. अब विकास के कार्यों से नक्सलवाद पर प्रहार किए जा रहे हैं.
हिड़मा के गांव मे विकास की रफ्तार: सरकार ने नियद नेल्लानार योजना से पूवर्ती गांव का विकास करना शुरू कर दिया है. यह गांव लंबे समय तक नक्सल कमांडर हिड़मा का गढ़ माना जाता रहा, अब विकास और विश्वास की राह पर यह आगे बढ़ रहा है. इसी सकारात्मक बदलाव की मिसाल गुरुवार को देखने को मिली, जब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने अपनी संवेदनशीलता और तत्परता से एक प्रसूता और नवजात की जान बचाई.
जवान पेश कर रहे मानवता की मिसाल: गुरुवार 18 सितंबर को पूवर्ती के जगरगुंडा इलाके में एक सुक्की नाम की महिला को प्रसव पीड़ा हुई. उसे पूवर्ती फील्ड अस्पताल पहुंचाया गया. हॉस्पिटल में महिला की हालत बेहद खराब हो रही थी, उसे एक बेहतर अस्पताल की जरूरत थी. महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए पूवर्ती में तैनात सीआरपीएफ के जवानों ने उसे जगरगुंडा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया. समय पर महिला को पहुंचाने की वजह से उसकी जान बच गई और सुरक्षित प्रसव हो पाया. सीआरपीएफ जवानों की इच्छाशक्ति और सड़क जैसी सुविधाओं की वजह से यह संभव हो सका.
पूवर्ती में हुआ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: सीआरपीएफ का यह मानवीय प्रयास केवल एक घटना नहीं है, बल्कि उस बड़े बदलाव का हिस्सा है जो इस क्षेत्र में धीरे-धीरे आकार ले रहा है. पूवर्ती कैंप में तैनात डॉक्टर नियमित रूप से ग्रामीणों का निःशुल्क उपचार करते हैं और ज़रूरी दवाइयां भी मुफ्त उपलब्ध कराते हैं. ऐसे प्रयासों ने ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित की है.
हम न सिर्फ क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तत्पर है बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा और उनकी हर संभव मदद करना हमारा कर्तव्य है- सीआरपीएफ 150वीं वाहिनी
विकास से नक्सलवाद पर प्रहार: नक्सल कमांडर हिड़मा का पूवर्ती गांव जहां लोग कभी भय और दहशत के साये में जीते थे आज वहां सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच चुकी हैं. आंगनबाड़ी भवन और स्कूल खुलने से शिक्षा की नई रोशनी घर-घर तक पहुंच रही है. बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और महिलाओं के मन में सुरक्षा की भावना पूवर्ती की बदलती तस्वीर को बयां कर रही है.
पूवर्ती में भय नहीं विकास का माहौल: बीते दो सालों के अंदर नक्सल कमांडर हिड़मा के गांव में फोर्स का कैंप खुल चुका है. यहां बेली ब्रिज स्थापित किया गया है. स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं से यह गांव लैस हो रहा है. सरकार के प्रयास से नक्सलवाद को झटका लगा है और लोगों में सुशासन का विश्वास पैदा हुआ है.