तीसरा राजस्व विभाग और कृषि विभाग द्वारा गिरदावरी की जा रही है। इनके रिकॉर्ड मिलान करने के बाद एक डाटा मिलेगा जो तकरीबन सही होगा। इसके हिसाब से धान खरीदा जाएगा। पिछले साल धान बेचने वाले किसानों का पंजीयन एग्रीस्टेक में ही अलग से हो रहा है। रायगढ़ जिले में वर्ष 24-25 में 73295 किसानों ने धान बेचा था। इसमें से 71203 का पंजीयन हो चुका है। 2092 किसान ऐसे हैं जिनका पंजीयन नहीं हो पा रहा है। अभी भी इनकी व्यक्तिगत जानकारी में सबकुछ मिलान नहीं हो पा रहा है। भूमि के संबंध में किसान की जानकारी अधूरी है। इसलिए इतने किसान पंजीयन से बच गए हैं।
केवल स्वयं की जमीन की ही होंगी एंट्री
सबसे बड़ी दिक्कत उन जमीनों की है जिनको किसान अधिया,रेट में लेकर खेती करते हैं। इसके अलावा वन अधिकार पट्टे और बिना नाम दुरुस्ती के कृषि कार्य करने वाले भी हैं। तकनीकी रूप से इन जमीनों के पट्टे में किसान का नाम नहीं होता। इसलिए पंजीयन में सख्त नियम बनाए गए हैं। बिना एग्रीस्टेक पंजीयन के कोई किसान धान नहीं बेच सकेगा।
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