छत्तीसगढ़ में बदला मानसून का पैटर्न: कम दिनों में तेज बारिश, तो कभी लंबे ड्राई स्पेल, अल-नीनो और क्लाइमेट चेंज से ऐसा

इस बार तय समय के आसपास एंट्री की उम्मीद

छत्तीसगढ़ में मानसून का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी यह समय से पहले पहुंच रहा है तो कभी सामान्य तारीख से 8 से 10 दिन की देरी हो रही है। प्रदेश में बारिश का सिस्टम पहले की तुलना में ज्यादा अस्थिर और अनिश्चित हो गया है। 2016 से 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि पहले कई दिनों तक लगातार बारिश होती थी, लेकिन अब कम समय में अत्यधिक वर्षा और लंबे ड्राई स्पेल जैसी स्थिति देखने को मिल रही है।

विशेषज्ञ इसके पीछे अल-नीनो, समुद्री तापमान में बदलाव और जलवायु परिवर्तन को बड़ी वजह मान रहे हैं। बस्तर में मानसून की एंट्री, वापसी और बारिश के वितरण में बदलाव आया है। कई सालों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई, लेकिन समय और पैटर्न अस्थिर रहे। इस बार तय समय के आसपास एंट्री की उम्मीद है।

एमएल साहू, मौसम विशेषज्ञ

छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है। आमतौर पर इसकी शुरुआत बस्तर संभाग से होती है और फिर रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर होते हुए उत्तर छत्तीसगढ़ तक विस्तार होता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। अब केवल आने की तारीख ही नहीं बदल रही, बल्कि वर्षा का वितरण भी प्रभावित हो रहा है। पहले कई दिनों तक बारिश होती थी, लेकिन अब कम समय में अत्यधिक वर्षा और लंबे ड्राई स्पेल जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। जून-जुलाई में अपेक्षाकृत कम बारिश और अगस्त-सितंबर में ज्यादा सक्रियता का ट्रेंड उभर रहा है।

इसका असर खेती, जल प्रबंधन और भूजल स्तर पर पड़ रहा है। अरब सागर व बंगाल की खाड़ी के तापमान में बदलाव, अल-नीनो जैसी वैश्विक मौसमी परिस्थितियां और जलवायु परिवर्तन मानसून की गति और वितरण को प्रभावित कर रहे हैं। 10 साल में 31 मई से 24 जून के बीच मानसून की एंट्री रही, लेकिन हर साल 1000 मिमी ज्यादा पानी गिरा है।

2026 में सामान्य से कम वर्षा के संकेत

मौसम विभाग ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में देशभर में 92% बारिश का अनुमान जताया है, जिसे बिलो नॉर्मल श्रेणी में रखा गया है। छत्तीसगढ़ में भी अल नीनो के प्रभाव से बारिश प्रभावित हो सकती है, पर स्थिति सूखे जैसी नहीं होगी, लेकिन बारिश का वितरण असमान रह सकता है।

अब जानिए... 10 साल में ऐसा बदला मानसून का ट्रेंड

31 मई 2025 रिकॉर्ड में सबसे जल्दीबस्तर में मानसून ने मई अंत में दस्तक दी।

8 जून 2024 सामान्य समय से पहले सुकमा के रास्ते प्रदेश पहुंचा।

23 जून 2023 अल-नीनो प्रभाव के कारण काफी देर से एंट्री हुइ

15 जून 2022 लगभग तय समय पर प्रदेश में पहुंचा।

10 जून 2021 अनुकूल परिस्थितियों के चलते जल्दी सक्रिय हु

11 जून 2020 बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से तेजी से आगे

21 जून 2019 सामान्य तिथि से करीब एक सप्ताह देर से पहुंच

22 जून 2018 कमजोर गतिविधियों के कारण देरी दर्ज हु

16 जून 2017 लगभग सामान्य समय पर प्रवेश हुआ।

बदलाव की ये बड़ी वजह

मानसून की अस्थिरता के पीछे अल-नीनो और जलवायु परिवर्तन बड़ी वजह हैं। अल-नीनो से मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ती हैं, जिससे बारिश कम और असमान होती है। वहीं बढ़ते तापमान के कारण कम समय में भारी बारिश, लंबे ड्राई स्पेल, चक्रवात, शहरीकरण और जंगलों की कटाई भी मानसून पैटर्न बदल रहे हैं।

2022 सबसे ज्यादा बारिश

2022 में सबसे ज्यादा 1275 मिमी और 2017 में सबसे कम 1041 मिमी बारिश दर्ज हुई। मानसून की एंट्री 8 से 23 जून के बीच हुई, जबकि वापसी अधिकतर अक्टूबर के पहले-दूसरे सप्ताह में रही।

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