बीजापुर का इंद्रावती टाइगर रिजर्व बारिश के बाद पर्यटकों के लिए खुलने जा रहा है। तेलंगाना, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ की सीमा में यह करीब 2799 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसे 1983 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।
करीब 40 साल के लंबे अंतराल के बाद नक्सल-मुक्त करीब 40 साल के लंबे अंतराल के बाद नक्सल-मुक्त होने से पर्यटकों की राह आसान हुई है। क्षेत्र में शांति बहाल हुई है। वन विभाग ने यहां ईको-पर्यटन को फिर से शुरू करने के लिए व्यापक योजना बनाई है। पर्यटक वन भैंसा, टाइगर, दूसरे वन्य जीव देख सकेंगे।
रिजर्व में बाघ, वन भैंसा, गिद्धों का झुंड देखा गया है। प्रदेश में करीब 19 बाघ हैं। टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना जारी है। यह इलाका घने साल के जंगलों, मिश्रित वन, विशाल जलग्रहण क्षेत्र के लिए जाना जाता है। यहां टाइगर के साथ तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल, दुर्लभ वन भैंसा, गिद्ध, कई जंगली जानवर, पक्षी मौजूद हैं।
योजना के अनुसार इंद्रावती नदी के तटों पर पर्यटन ग्राम विकसित किए जाएंगे। इसके लिए दो प्रमुख प्रवेश द्वार तय किए गए हैं। पहला प्रवेश कुटरू-फरसेगढ़ क्षेत्र से होगा। दूसरा प्रवेश भोपालपटनम के पास मट्टीमरका क्षेत्र से होगा।
कुटरू-फरसेगढ़ को टाइगर रिजर्व का मुख्य केंद्र माना जा रहा है। यहां से अभयारण्य के भीतरी हिस्सों में प्रवेश हो सकेगा। मट्टीमरका क्षेत्र भोपालपटनम से करीब 20 किलोमीटर दूर है। यह सुनहरी रेत, प्राकृतिक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में वन विभाग ग्रामीणों को जागरूक कर रहा है।
वन्य प्राणियों की जानकारी दी जा रही है। संरक्षण के बारे में बताया जा रहा है। ताकि उन्हें नुकसान न पहुंचे। संरक्षण में योगदान बढ़े। पर्यटन ग्रामों से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, रहन-सहन, प्राकृतिक जीवनशैली करीब से देखने का मौका मिलेगा।
स्थानीय आदिवासी समुदाय, आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे। वन विभाग सड़क, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा है। ताकि पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
नक्सलियों की मौजूदगी के चलते पहले जाना संभव नहीं था, अब जगह-जगह कैमरे
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में नक्सलियों की सीधी पाबंदी थी। किसी को आने-जाने नहीं देते थे। अब बस्तर नक्सल-मुक्त होने के बाद आईटीआर में आम लोग जा सकेंगे। जो नक्सली यहां जाने से रोकते थे, उन्हीं को प्रशिक्षण देकर गाइड बनाने की तैयारी है।
समर्पण कर चुके नक्सलियों को इस क्षेत्र की पूरी जानकारी है। इन्हें जल्द गाइड के रूप में तैयार किया जा सकेगा। दूसरी जंगल सफारी की तरह यहां भी पर्यटकों को जिप्सी मिलेगी।
बारिश के बाद जंगल सफारी खोलने की तैयारी है। पर्यटन के लिहाज से लोगों को आने-जाने में दिक्कत न हो, इसके लिए सड़क और दूसरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पूरा जंगल कैमरे की निगरानी में है। इस टाइगर रिजर्व में डेढ़ सौ किलोमीटर के दायरे में बाघ की मौजूदगी रहती है। यह पर्यटकों के लिए खास होगा।
बस्तर में स्थित आईटीआर में आदर्श राष्ट्रीय उद्यान की सभी विशेषताएं हैं। यहां विशाल ग्रासलैंड है। जल संरचनाएं हैं। बांस के जंगल हैं। समृद्ध जैव विविधता है। उन्होंने बताया कि रिजर्व के अन्य क्षेत्रों को भी विकसित करने की योजना है। संदीप बलगा, डायरेक्टर, इंद्रावती टाइगर रिजर्व
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