मेघा पुल बना नहीं, अब वैकल्पिक मार्ग भी बंद, राहगीर परेशान

कुरुद, 6 जुलाई। मेघा पुल धंसकने के बाद आवागमन के लिए बनाए गए वैकल्पिक मार्ग को पहली बरसात के बाद कल से बंद कर दिया गया है। जिससे अब नदी पार करने लोगों को दुसरे रुट से लम्बा चक्कर लगना पड़ रहा है। हाई लेवल पुल निर्माण में विलंब होने का खामियाजा हजारों मुसाफिरों को रोज उठाना पड़ रहा है।

ज्ञात हो कि पिछले दो दिनों से धमतरी जिले में हो रही झमाझम बारिश के बाद मेघा के महानदी में बने एप्रोच रोड़ को बंद कर दिया गया। जिससे इस मार्ग में दो और चार पहिया वाहनों का आना जाना थम गया है। गत वर्ष भी ठेकेदार द्वारा मिट्टी मुरुम से बनवाया गया डायवर्सन रोड़ पहली ही बारिश में बह गया था।

यहाँ पर यह बताना लाजमी होगा कि 21 सितंबर 2024 को महानदी पर बना मेघा पूल ढह गया था। जिससे कुरूद और मगरलोड ब्लॉक की सीधी कनेक्टिविटी खत्म हो गई है। तब से कुरुद एवं मगरलोड क्षेत्र के हजारों लोगों को नदी पार करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आवागमन बाधित होने से दोनों ही ओर का व्यापार चौपट और किसानों की आमदनी पर विपरीत

प्रभाव पड़ने लगा है। हालांकि सेतु निगम यहाँ नया पुल बनवाने में लगा है। लेकिन कार्य में गति नहीं होने से निर्माण अधूरा है। नदी में आवागमन सुचारू रखने करीब एक किलोमीटर लंबा वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था, उसे भी मिट्टी डाल कर रविवार शाम से बंद कर दिया गया है। अब बाइक सवार जान जोखिम में डाल एनिकट से नदी पार करने विवश हैं। जबकि चार पहिया वाहनों को खट्टी, करेली-नारी, राजिम मार्ग से 20-25 किमी का अतरिक्त सफर करना पड़ रहा है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि समय रहते पुल निर्माण का काम होता तो उन्हें इस तरह की समस्या से जूझना नहीं पड़ता। लोगों ने पिछले दिनों निर्माणाधीन पुल से गर्डर गिरने के गंभीर मामले की निष्पक्ष जाँच कर गुणवत्ता का पता लगाने की मांग की है।

इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए जब सेतु निगम की अनुविभागिय अधिकारी रंजना कश्यप से उनके नंबर पर संपर्क किया गया, पर उन्होंने फोन रिसिव नही किया।।

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