धमतरी। गंगरेल जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद महानदी के किनारे बसे कई गांवों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हुई। विकासखंड नगरी के अंतिम गांव दरगहन भी इसकी चपेट में आया, जहां ग्राम का एक मोहल्ला नया डीही सबसे अधिक प्रभावित हुआ, इस मोहल्ले के लगभग 100 से अधिक घरों में लगभग 4 फ़ीट बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति की जानकारी मिलने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने 25 सितंबर से ही संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर राहत एवं आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर प्रयास शुरू कर दिए थे। इसके बाद शनिवार 26 सितंबर की सुबह वे दरगहन पहुंचे और प्रभावित क्षेत्र में पांच घंटे से अधिक समय बिताकर स्थिति का जायजा लिया। दरगहन पहुंचते ही ग्रामीणों ने पेयजल और भोजन की व्यवस्था को लेकर अपनी परेशानी अरुण सार्वा के सामने रखी। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह तक उनके लिए पर्याप्त पेयजल और भोजन की व्यवस्था नहीं हो पाई थी। इस पर सार्वा ने तत्काल आसपास की ग्राम पंचायतों से टैंकर बुलाकर पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराई और राहत व्यवस्था को सक्रिय करने के निर्देश दिए। प्रभावित परिवारों को आने वाले दिनों में भोजन की परेशानी न हो, इसके लिए अपनी ओर से भी आवश्यक खाद्य सामग्री सहित अन्य सब्जियों की व्यवस्था कराई गई, ताकि राहत के दौरान ग्रामीणों के भोजन की व्यवस्था बनी रहे। मौके पर ग्रामीणों पंचराम सेन, विषयलाल साहू, नारायण 15 दिनों तक पेयजल-भोजन की व्यवस्था करने के निर्देश निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सदस्य अजय फत्तेलाल ध्रुव, जनपद पंचायत नगरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नारद मांझी और तहसीलदार ख्याति कंवर भी मौजूद रहे। अरुण सार्वा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित क्षेत्र में आने वाले दिनों में ग्रामीणों को पेयजल और भोजन की समस्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने करीब 15 दिनों तक आवश्यक व्यवस्थाएं बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। जिन परिवारों के मकान बाढ़ से इस स्थिति में पहुंच गए हैं उनके लिए शासकीय भवनों अथवा अन्य सुरक्षित भवनों में ठहरने की व्यवस्था की जाए। साहू, कुंभकरण निषाद, रोहित साहू, जेलू राम यादव, चुंबन राम साहू और नोहर निषाद सहित अन्य लोगों समय पर सूचना व राहत व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने रखी बात ग्रामीणों ने गंगरेल जलाशय से पानी छोड़े जाने की सूचना समय पर नहीं मिलने को लेकर भी अपनी बात रखी। उनका कहना था कि यदि पानी छोड़े जाने की जानकारी कुछ समय पहले मिल जाती तो वे घरेलू सामान और परिवार के सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की तैयारी कर सकते थे। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि करीब 1500 की आबादी वाले क्षेत्र के लिए केवल एक नाव उपलब्ध होने से आवागमन और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने में परेशानी हुई। निरीक्षण के दौरान कई घरों में बाढ़ से हुए नुकसान की गंभीर तस्वीर सामने आई। घरों में रखा सामान, खाद्य सामग्री और बच्चों की पढ़ाई की किताबें तक पानी में खराब हो गईं। 80 वर्षीय फ़ग्नीबाई निषाद, जो लंबे समय से लकवे से पीड़ित हैं, के घर में करीब साढ़े तीन फीट पानी भर जाने से स्थिति बेहद कठिन हो गई थी। परिवार के सदस्यों को उन्हें घर के भीतर उपलब्ध खाली तेल के टीपों के सहारे ऊंचाई पर सुरक्षित रखना पड़ा। इस स्थिति को देखकर बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। लोकनाथ निषाद, लक्ष्मी विश्वकर्मा तथा मूलचंद और ममता साहू के मकानों सहित अन्य प्रभावित परिवारों के घरों का भी सार्वा ने निरीक्षण किया। ने बाढ़ से उत्पन्न परिस्थितियों और अपनी समस्याओं से जिला पंचायत अध्यक्ष को अवगत कराया।
दरगहन के 100 से अधिक घरों में घुसा पानी
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