छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के भटगांव में धर्मांतरित महिला के अंतिम संस्कार को लेकर हंगामा हो गया। समाज के लोगों ने परिवार पर ईसाई धर्म अपनाने का आरोप लगाते हुए पहले अंतिम संस्कार में शामिल होने से मना कर दिया। इसके बाद करीब एक घंटे तक बैठक चली। बैठक में परिवार से समाज के रीति-रिवाज मानने और हिंदू धर्म में रहने की सहमति ली गई। इसके बाद तिलक लगाकर, गंगाजल का छिड़काव और गंगाजल पिलाकर परिवार को दोबारा समाज में शामिल किया गया। इसके बाद महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से कराया गया। परिवार ने कहा कि करीब चार साल पहले अपनी इच्छा से ईसाई धर्म अपनाया था, लेकिन अब अपनी मर्जी से वापस हिंदू धर्म में लौट रहे हैं। यह मामला रूद्री थाना क्षेत्र का है। पहले देखिए तस्वीरें अब जानिए पूरा मामला भटगांव के सुनील ध्रुव (35) की पत्नी सरस्वती ध्रुव (28) की मौत के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान समाज के कुछ लोगों ने परिवार के धर्मांतरण करने की बात कहते हुए अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसे लेकर गांव में विवाद की स्थिति बन गई और समाज के लोगों के बीच बैठक शुरू हो गई। स्थिति को देखते हुए विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पूर्व जिला अध्यक्ष संदीप अग्रवाल को भी मौके पर बुलाया गया। बैठक में परिवार से समाज के रीति-रिवाज मानने को लेकर बातचीत हुई। संदीप अग्रवाल ने परिवार को समझाइश दी। इसके बाद सुनील ध्रुव ने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म और समाज के रीति-रिवाजों को मानने की बात कही। तिलक लगाकर, गंगाजल पिलाकर समाज में किया शामिल संदीप अग्रवाल के मुताबिक, सुनील ध्रुव की सहमति के बाद गंगाजल का छिड़काव किया गया और गंगाजल पिलाया गया। देवी-देवताओं की पूजा कर उन्हें दोबारा आदिवासी समाज में शामिल किया गया। इसके बाद मृत महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज और विधि-विधान से कराया गया। उन्होंने बताया कि सुनील ध्रुव ने लिखित रूप से भी अपनी सहमति दी है कि वह बिना किसी दबाव के हिंदू धर्म में वापस आ रहे हैं और आगे अपने पुराने धर्म और समाज के रीति-रिवाजों का पालन करेंगे। बोले- अपनी मर्जी से ईसाई धर्म अपनाया था सुनील ध्रुव ने कहा कि उन्होंने करीब चार साल पहले अपनी इच्छा से ईसाई धर्म अपनाया था। अब उन्होंने दोबारा ईसाई धर्म में नहीं जाने और हिंदू धर्म में रहने की बात कही है। उन्होंने कहा कि वह अपनी मर्जी से वापस हिंदू धर्म में लौटे हैं। मामले को लेकर करीब एक घंटे तक समाज के लोगों के बीच बातचीत चली। सहमति बनने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। |