आज साल का सबसे छोटा दिन, 21 दिसंबर से बढ़ने लगती है ठंड और सूरज से दूरी भी

आज साल का सबसे छोटा दिन, 21 दिसंबर से बढ़ने लगती है ठंड और सूरज से दूरी भी
21 दिसंबर अमूमन साल का सबसे छोटा दिन होता है. ये दिन दुनियाभर के लोगों को रोमांचित करता है. इसे विंटर सॉल्सटिस भी कहते हैं. दुनिया के कई हिस्सों में इस दिन त्योहार मनाते हैं. आपको महसूस हो रहा होगा कि समूचे उत्तर भारत में एक दो दिनों से ठंड में कुछ तुर्शी आ गई है. इस दिन से कड़कड़ाहट और कंपकंपी वाली ठंड शुरू होती है. जानिए क्या है 21 दिसंबर का महत्व.आज यानी 21 दिसंबर को साल का सबसे छोटा दिन होता है. वैसे जरूरी नहीं कि ये हर साल 21 दिसंबर को ही हो. कभी-कभार ये एक दो दिन आगे पीछे हो सकता है. मसलन पिछले साल ये दिन 22 दिसंबर को था. गणना के हिसाब से इस साल भी जब हम रात को सोएंगे तो रात 03.17 बजे ‘सॉल्सिटिस डे’ दबे पांव प्रवेश करेगा. इस सबसे छोटे दिन को विंटर सॉल्सटिस (Winter solstice) कहते हैं. जानिए, क्या है इसके पीछे का विज्ञान और इस दिन से पहले और बाद में क्या-क्या बदलता है.सबसे पहले तो समझते हैं कि सॉल्सटिस क्या है. ये एक लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ है सूरज का स्थिर हो जाना. धरती अपने अक्ष पर घूमते हुए सूरज की ओर दिशा बदलती है. ऐसे में धरती का जो हिस्सा सूरज के संपर्क में आता है, उसे सॉल्सटिस शब्द से जोड़ दिया जाता है.उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिनउत्तरी गोलार्ध में आज का दिन सबसे छोटा है. इसका मतलब ये है कि इस दिन धरती के इस हिस्से में सूरज सबसे कम देर के लिए रहेगा. वहीं दक्षिणी गोलार्ध में आज ही सूरज सबसे ज्यादा देर तक रहेगा और इस तरह से इस हिस्से में आने वाले देश आज के दिन सबसे बड़ा दिन देखेंगे. जैसे अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में आज से गर्मी की शुरुआत हो रही है

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