मॉडर्न गांवः करेली छोटी में परिवार की संख्या के हिसाब से प्लॉटिंग; न अपराध, न ही अतिक्रमण

    Praveen Kumar 
   श्रीमती कांति साहू के पुत्र निर्मल साहू की रिपोर्ट

धमतरी जिले का करेली छोटी गांव। इसमें व्यवस्थित डेनेंज सिस्टम है। गांव की अपनी प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था है। सड़क, नाली, भवन, बिजली के साथ गांव व स्कूल की अन्य छोटी-मोटी जरूरतों के लिए यह गांव शासन पर आश्रित नहीं है। ग्राम विकास समिति करीब एक करोड़ रुपए का विकास अपने बूते कर चुकी है। फंड में आज 27 लाख रुपए जमा है। 50 के दशक में जब भिलाई में टाउनशिप आकार ले रहा था, तब यहां 125 किमी दूर धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक का 6000 आबादी वाला गांव करेली छोटी भी बस रहा था। सरपंच डॉ. परमेश्वर साहू बताते हैं कि मालगुजार दाऊ पवन अग्रवाल ने 1953 में भोपाल से इंजीनियर बुलाकर गांव का मास्टर प्लान बनवाया। शेष| पेज 05

16 जातियां मिल-जुलकर रहती हैं, धान से उन्नति

गांव में 327 साहू परिवार हैं। ब्राह्मण, अग्रवाल, वैष्णव, यादव, निषाद, गोड़, राउत, सतनामी, लोहार, सिदार, नाई, धोबी, नगारची और मुस्लिम सहित 16. जातियों के लोग रहते हैं। दोनों सीजन में महानदी से लगी भूमि धान से लहलहाती है। प्रति एकड़ 30 से 40 क्विंटल धान के उत्पादन ने इस गांव को समृद्ध और खुशहाल बना दिया है। बड़ी संख्या में पढ़-लिखकर युवा खेती कर रहे हैं

थाने में कोई FIR नहीं, आपस में सुलझाते हैं केस

बुजुर्ग जनक वैष्णव, शांतनु राम साहू और देवनाथ साहू बताते हैं कि गांव की संस्कृति ऐसी है कि कोई विवाद नहीं होता। कभी अनबन हो भी जाए तो लोग आपस में सुलझा लेते हैं। यही वजह है कि थाने में न एफआईआर दर्ज है, न ही अदालत में मामला। विवाद सुलझाने ग्राम विकास एवं सुरक्षा समिति है। अध्यक्ष अपनी मर्जी से 7 से 15 सदस्य मनोनीत करते हैं। जिरस्का फैसला सभी को मान्य होता है।

यह भिलाई या किसी बड़े शहर की टाउनशिप नहीं, बल्कि धमतरी जिले का करेली छोटी गांव है। ये व्यवस्थित टाउनशिप का उदाहरण है, जिसमें 40-40 फीट की दो मुख्य सड़कें, 20-20 फीट चौड़ी 5 गलियां हैं। गांव 1958 में बसना शुरू हुआ। जिस परिवार में जितने बेटे थे, उत्तने प्लॉट अलॉट हुए। फोटोः अजीत सिंह माटिया।







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