प्रदेश का पहला खुशहाल और समृद्धशाली गांव: धमतरी की 'छोटी करेली' बन रही देश के लिए मिसाल

धमतरी | विशेष रिपोर्ट
भारत को "गांवों का देश" कहा जाता है और यह बात यूं ही नहीं कही जाती — भारत की आत्मा वास्तव में उसके गांवों में बसती है। इन्हीं गांवों में से एक छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित "छोटी करेली" है, जो आज पूरे प्रदेश के लिए एक आदर्श बनकर उभरा है। मगरलोड विकासखंड के इस छोटे से गांव ने वह कर दिखाया है, जो बड़ी-बड़ी नगरपालिकाएं भी नहीं कर पाईं।

यह गांव अब "छत्तीसगढ़ का पहला खुशहाल और समृद्ध गांव" कहे जाने की ओर अग्रसर है। यहां की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गांव पूरी तरह से योजना बद्ध तरीके से बसाया गया है, और वह भी कोई सरकारी योजना नहीं, बल्कि गांव के ही दूरदर्शी सोच रखने वाले मालगुजार दाऊ पवन कल्याण की पहल पर।


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1952 में शुरू हुआ सपना — बना आज का आदर्श मॉडल


छोटी करेली गांव की कहानी शुरू होती है साल 1952 से, जब इस गांव को हर साल महानदी की बाढ़ का सामना करना पड़ता था। लोग अपने घर छोड़कर शरणार्थियों की तरह जीने को मजबूर थे। तब गांव के प्रतिष्ठित व्यक्ति दाऊ पवन कल्याण ने एक साहसिक निर्णय लिया — गांव को नई जगह बसाने का।

इसके लिए उन्होंने 36 एकड़ ज़मीन चिह्नित की और 1953 में भोपाल से इंजीनियर बुलाकर एक मास्टर प्लान तैयार कराया। इस प्लान में 40 फीट चौड़ी सड़कों, 20 फीट की नालियों, साफ-सुथरे ड्रेनेज सिस्टम, स्कूल, मंदिर, राशन दुकान, श्मशान घाट, खेल मैदान जैसी सभी सुविधाएं सुनियोजित तरीके से जोड़ी गईं।


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हर परिवार को मिला प्लॉट — प्लानिंग में दिखा अनूठा विजन


सबसे विशेष बात यह रही कि जिस परिवार में जितने बेटे थे, उन्हें उतने प्लॉट आबंटित किए गए। यानी न केवल वर्तमान की चिंता, बल्कि भविष्य को भी ध्यान में रखकर गांव का पुनर्निर्माण किया गया।

यही नहीं, गांव के विकास और आत्मनिर्भरता को बनाए रखने के लिए एक ग्राम समिति का गठन किया गया, जिसमें सभी ग्रामीण अपनी आय का एक हिस्सा जमा करते हैं। यही समिति आज गांव के सभी कार्यों को संचालित करती है।


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गांव समिति का कमाल — 1 करोड़ से अधिक के कार्य और 30 लाख की वर्तमान जमा पूंजी


छोटी करेली की ग्राम समिति ने अब तक 1 करोड़ रुपए से भी अधिक के विकास कार्य कराए हैं — जिसमें सड़क मरम्मत, स्कूल के रखरखाव, बिजली सुधार, पानी की व्यवस्था और सामुदायिक भवन निर्माण शामिल हैं।

इतना ही नहीं, वर्तमान में भी समिति के पास 30 लाख रुपए की जमा पूंजी है। यह किसी पंचायत निधि से नहीं, ग्रामीणों की एकता और अनुशासन से संभव हुआ है।


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अद्भुत सामाजिक व्यवस्था — अंतिम संस्कार से लेकर न्याय तक समिति ही करती है फैसला


छोटी करेली न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर में उदाहरण है, बल्कि सामाजिक न्याय और सहयोग के क्षेत्र में भी मिसाल है। गांव में किसी गरीब के घर अगर अंतिम संस्कार की जरूरत होती है तो कफ़न से लेकर अंतिम क्रिया तक का पूरा खर्च समिति उठाती है।

यहां तक कि गांव में कोई अपराध नहीं होता। यदि कोई विवाद होता भी है, तो समिति का निर्णय अंतिम माना जाता है। यही वजह है कि गांव की पुलिस स्टेशन में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं है।


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प्रशासन की भी नजर में खास — कलेक्टर ने किया दौरा, अवॉर्ड के लिए नामांकन प्रस्तावित


धमतरी जिले के कलेक्टर अभिनव मिश्रा ने भी छोटी करेली गांव की प्रशंसा करते हुए वहां निरीक्षण की योजना बनाई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि इस गांव को राज्य स्तरीय अवॉर्ड के लिए नामांकित किया जाएगा।

प्रशासन इस गांव में लघु उद्योगों की स्थापना और रोजगार मूलक कार्यों को बढ़ावा देने की योजना भी बना रही है, ताकि यहां के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और गांव पूरी तरह आत्मनिर्भर बने।


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भविष्य की सोच — डिजिटल और स्मार्ट गांव की ओर बढ़ते कदम


छोटी करेली केवल भूतकाल की नहीं, भविष्य की भी सोच रखता है। गांव में अब डिजिटल इंडिया मिशन के तहत इंटरनेट सुविधा, डिजिटल शिक्षा और ई-गवर्नेंस जैसे उपायों पर भी चर्चा हो रही है।

इसके अलावा सोलर स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन, और वृक्षारोपण अभियान जैसे कार्यों पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे यह गांव वास्तव में "स्मार्ट विलेज" बन सके।


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निष्कर्ष: जब इच्छा, योजना और एकता हो, तो गांव भी बन सकते हैं शहर से बेहतर


छोटी करेली सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि एक विचार है — कि अगर इच्छा शक्ति हो, नेतृत्व सक्षम हो और लोग एकजुट हों, तो कोई भी गांव समृद्ध, आत्मनिर्भर और खुशहाल बन सकता है।

आज जब देश भर में गांवों को स्मार्ट बनाने की बात हो रही है, छोटी करेली पहले ही यह साबित कर चुका है कि ग्रामीण विकास केवल योजनाओं से नहीं, ज़मीन पर ईमानदारी से काम करने से होता है।


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📌 विशेष तथ्य (Highlight Points):


  • गांव की योजना 1953 में बनी थी, अब भी वही नियम लागू

  • ड्रेनेज, चौड़ी सड़क, स्कूल, मंदिर सब योजनाबद्ध

  • 1 करोड़ रुपए से ज्यादा के कार्य ग्राम समिति द्वारा

  • अंतिम संस्कार तक का खर्च समिति उठाती है

  • गांव में अपराध शून्य, कोई एफआईआर नहीं

  • जल्द ही राज्य पुरस्कार के लिए नामांकित होने वाला पहला गांव

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