बारिश में आफत बनी नदी-नाले

नगरी क्षेत्र की अधिकतर आबादी वनांचल क्षेत्रों में बसी हुई है। बारिश का मौसम यहां रहने वाले ग्रामीणों के लिए किसी आफत से कम नहीं है। पुल-पुलिया के अभाव में ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर नदी- नाले पार कर आवागमन करने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा हो या फिर जीविकोपार्जन, कोई भी काम नदी- नाले पार किए बिना पूरा नहीं होता। आदिवासी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मनोज साक्षी ने शासन-प्रशासन से पुल पुलिया बनाने की मांग की है। इसी तरह ग्राम पंचायत लटियारा में बारिश के दौरान एक बीमार व्यक्ति को ग्रामीणों ने खाट पर बिठाकर बाढ़ से उफनती नदी पार कराई, जिसके बाद वह इलाज के लिए पहुंच सका।

टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बसे ग्रामीणों की स्थिति भी लंबे समय से दयनीय बनी हुई है। आजादी के बाद से यह वनांचल क्षेत्र विकास की बाट जोह रहा है। यहां स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा, बिजली, सड़क और नदी-नालों पर पुल-रपटा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।

समस्याओं का समाधान नहीं ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार शांतिपूर्ण तरीके से शासन-प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत करा चुके हैं। मांगें पूरी नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन भी किए गए, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। बारिश शुरू होते ही इन ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। नदी पार कराने के लिए 100 रुपये सरपंच बीरबल पदमाकर, चंद्रकुमार अग्रवानी, रेवा देवदास, संतराम नेताम ने बताया कि बारिश के दिनों में रिसगांव से ब्लॉक मुख्यालय जाने के लिए सोंदूर नदी पार करना पड़ता है। नदी में दो से तीन फीट पानी रहने के दौरान ग्रामीण जान जोखिम में डालकर बाइक पार कराते हैं। इसके लिए करीब 100 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। बाढ़ अधिक होने पर महज 35 किलोमीटर का रास्ता गरियाबंद जिला होकर करीब 80 किलोमीटर का हो जाता है। वहां भी बाढ़ की स्थिति बनी रही तो ग्रामीणों को गरियाबंद जिले में रिश्तेदारों के यहां शरण लेना पड़ता है।


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