रायपुर | 8 जून 2025:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला जेल में पदस्थ शिक्षक नेतराम नाकतोड़े द्वारा कैदी के साथ मारपीट का है। आरोप है कि शिक्षक ने बंद कैदी श्याम देशमुख को कुछ अन्य कैदियों से पिटवाया। मामले ने तूल पकड़ा तो प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक को सस्पेंड कर दिया है।
यह मामला न सिर्फ एक संवेदनशील कैदी पर हमले का है, बल्कि जेल के भीतर सुरक्षा और मानवाधिकारों की स्थिति पर भी सवाल खड़ा करता है।
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क्या है पूरा मामला?
कुनबी समाज से ताल्लुक रखने वाले श्याम देशमुख को 4 जून 2025 को एक सामाजिक विवाद के चलते न्यायिक रिमांड पर रायपुर सेंट्रल जेल में रखा गया था। श्याम को 7 जून को जमानत मिली और जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने चौंकाने वाले खुलासे किए।
उन्होंने दावा किया कि जेल में शिक्षक नेतराम नाकतोड़े ने कुछ कैदियों को उकसाकर उन पर हमला करवाया। मारपीट की यह घटना पूर्वनियोजित थी। जेल से छूटते ही श्याम देशमुख और उनके समाज के प्रतिनिधियों ने गंज थाना पहुंचकर इस घटना की लिखित शिकायत दी।
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श्याम देशमुख की पत्नी का सड़क पर प्रदर्शन
शनिवार को रायपुर में एक भावनात्मक और विरोधात्मक दृश्य सामने आया, जब श्याम देशमुख की पत्नी शिल्पा देशमुख ने उन्हें ठेले पर बैठाकर राजधानी की सड़कों पर न्याय की गुहार लगाई। यह दृश्य सोशल मीडिया और न्यूज़ मीडिया में वायरल हो गया और लोगों का ध्यान इस संवेदनशील मुद्दे की ओर खिंचा।
शिल्पा ने कहा—
> "मेरे पति को साजिश के तहत पीटा गया। जेल के भीतर इस तरह की हिंसा बेहद शर्मनाक है। हम केवल न्याय चाहते हैं।"
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कुनबी समाज का विरोध और डिप्टी सीएम से मुलाकात
इस मामले में कुनबी समाज भी एकजुट हो गया है। समाज के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात की और पूरे मामले की जानकारी दी। समाज ने शिक्षक नेतराम को सस्पेंड करने की मांग की थी, जिसे प्रशासन ने तुरंत मानते हुए नेतराम नाकतोड़े को निलंबित कर दिया।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि—
> "मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। FIR दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।"
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पुलिस और जेल प्रशासन की प्रतिक्रिया
गंज थाना पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि मामला गंभीर है। जांच जेल प्रशासन द्वारा की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद ही FIR दर्ज की जाएगी और फिर कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।
हालांकि, समाज का यह भी आरोप है कि सिर्फ शिक्षक ही नहीं बल्कि जेल की सुरक्षा और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत को भी जांच के दायरे में लाया जाए।
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क्या कहते हैं मानवाधिकार और विशेषज्ञ?
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने जेल में हुई इस घटना को "संवैधानिक उल्लंघन" बताया है। उनका कहना है कि जेल में बंद किसी भी व्यक्ति के साथ मारपीट या उत्पीड़न को संविधान बर्दाश्त नहीं करता। यह क़ानून के शासन की भावना के खिलाफ है।
जेल सुधार विशेषज्ञ डॉ. एस.पी. सिंह का कहना है:
> "यदि जेल में पदस्थ कर्मचारी खुद ही हमले की साजिश रचने लगे, तो यह पूरे सिस्टम के लिए खतरे की घंटी है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।"
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आम जनता और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया है। ट्विटर और फेसबुक पर #JusticeForShyamDeshmukh ट्रेंड करने लगा। कई लोगों ने प्रशासन की सराहना की कि सस्पेंशन जैसी त्वरित कार्रवाई की गई, लेकिन यह भी सवाल उठाया कि जेल के भीतर ऐसी घटना कैसे घट गई?
लोगों ने इस बात पर चिंता जताई कि जेल जैसी उच्च सुरक्षा वाली जगह पर भी मानवाधिकारों का हनन हो सकता है, तो आम जनता कितनी सुरक्षित है?
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निष्कर्ष और आगे की राह
रायपुर सेंट्रल जेल में श्याम देशमुख के साथ हुई मारपीट की यह घटना निश्चित रूप से प्रशासन और कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह घटना जेलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवाधिकारों की निगरानी की आवश्यकता को दोहराती है।
अब जब शिक्षक सस्पेंड हो चुके हैं और गृहमंत्री स्तर पर कार्रवाई का आश्वासन मिल गया है, समाज को उम्मीद है कि जल्द FIR भी दर्ज होगी और आरोपियों को सजा मिलेगी।
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