ब्रेकिंग न्यूज | छत्तीसगढ़ | एक्सक्लूसिव रिपोर्टSECL के मानिकपुर माइंस में डंपर हादसे की जांच शुरू: DGMS नागपुर की टीम सक्रिय, हादसे को दबाने में जुटे थे अधिकारी

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SECL के मानिकपुर माइंस में डंपर हादसे की जांच शुरू: DGMS नागपुर की टीम सक्रिय, हादसे को दबाने में जुटे थे अधिकारी!

📍 स्थान: कोरबा, छत्तीसगढ़
📅 तारीख: 21 मई 2025
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SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की मानिकपुर परियोजना में हाल ही में हुए एक गंभीर डंपर हादसे की जांच अब DGMS (Directorate General of Mines Safety) नागपुर की मैकेनिकल टीम द्वारा शुरू कर दी गई है। यह दुर्घटना 19 मई की रात उस समय हुई जब 60 टन वजनी डंपर का पिछला हिस्सा पूरी तरह से टूट गया, जिसमें ऑपरेटर की जान बाल-बाल बची।

💥 हादसे की पूरी कहानी

मानिकपुर माइंस में कार्यरत डंपर ऑपरेटर भुवन राज रोज की तरह अपनी ड्यूटी पर पहुंचा था। उसे एक्सवेसन टीम की ओर से बताया गया कि डंपर पूरी तरह से सुरक्षित और चालू हालत में है। लेकिन जैसे ही वह डंपर लेकर खदान की ओर रवाना हुआ, कुछ ही दूरी पर डंपर के पिछले हिस्से के चारों पहिए एक्सल सहित टूटकर अलग हो गए। हादसे में भुवन राज को चोटें आईं और उसे इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती किया गया।

सौभाग्यवश, उस वक्त वहां मौजूद कोयला परिवहन के अन्य वाहन डंपर की चपेट में आने से बच गए, वरना यह हादसा और भी गंभीर रूप ले सकता था।


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🛠 रख-रखाव की अनदेखी बनी हादसे की वजह?

सूत्रों की मानें तो यह हादसा डंपर के रख-रखाव में लापरवाही के चलते हुआ। जिस डंपर की क्षमता 60 टन थी, उसके पिछले पहियों का इस तरह से टूटना एक गंभीर तकनीकी गड़बड़ी और लापरवाही को दर्शाता है।

🚨 हादसे को दबाने में जुटे थे अधिकारी

हादसे के तुरंत बाद SECL प्रबंधन के अधिकारियों ने DGMS को जानकारी नहीं दी, जो कि एक कानूनी बाध्यता है। इसके बजाय स्थानीय एरिया सेफ्टी कमेटी से जांच कराकर मामले को दबाने की कोशिश की गई।
माना जा रहा है कि यदि DGMS को पहले ही जानकारी दी जाती, तो मेंटनेंस विभाग में चल रही लापरवाहियों की परतें खुल जातीं।


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📸 मीडिया की सजगता बनी सच्चाई सामने लाने का जरिया

जब यह मामला मीडिया की नजर में आया तो खबरें तेजी से सामने आने लगीं। जैसे ही मीडिया ने कवरेज शुरू की, मानिकपुर परियोजना के अधिकारी बैकफुट पर आ गए। आज ही DGMS नागपुर की मैकेनिकल टीम मानिकपुर पहुंचकर मौके का मुआयना कर रही है।

लेकिन इस दौरान मीडिया को कवरेज से रोकने की कोशिशें भी की गईं। अधिकारी कैमरे से बचते रहे और किसी भी तरह की जानकारी देने से इनकार करते नजर आए।


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🔍 अब जांच के घेरे में SECL

DGMS की जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि –

डंपर की हालत ऐसी क्यों हुई?

मेंटनेंस रिपोर्ट में क्या दर्ज है?

ऑपरेटर को बिना उचित जांच के डंपर क्यों दिया गया?


इस मामले में अगर किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही या प्रबंधन स्तर पर चूक पाई जाती है तो SECL के कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।


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🔚 निष्कर्ष

SECL के मानिकपुर माइंस में डंपर हादसा सिर्फ एक तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक सिस्टमेटिक फेल्योर की चेतावनी है। ऐसे समय में जब खनन क्षेत्र में सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, वहां अधिकारियों द्वारा सूचना छुपाना और जांच को दबाने की कोशिश गंभीर चिंता का विषय है।

DGMS की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि दोषी कौन हैं और क्या कार्रवाई की जाएगी। लेकिन एक बात तय है – अब यह मामला जनता और मीडिया की नजर में है, और इसे दबा पाना आसान नहीं होगा।

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