ऐसे चला रेस्क्यू आपरेशन
हाथी बड़ा था । गड्ढे में गिरने के बाद वह खुद निकलने का प्रयास करता रहा लेकिन सफल नहीं हो सका। लगातार कोशिशों के कारण कीचड़ और दलदल हो गया था। वन विभाग की टीम ने पुराने अनुभवों के आधार पर गड्ढे के एक हिस्से को एक्सीवेटर से काटना शुरू किया। गहराई को कम कर देने से हाथी के सुरक्षित बाहर निकल जाने की संभावना थी। एक्सीवेटर आपरेटर ने सूझबूझ और संयम से गड्ढे के एक हिस्से की गहराई को मिट्टी काटकर कम करने के प्रयास में लगा रहा। इसका सुखद परिणाम सामने आया चढ़ने हेतु रास्ता सुगम होने पर हाथी सुरक्षित गड्ढे से बाहर निकला और तेजी से आगे बढ़ गया रेस्क्यू आपरेशन के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी विजय कुमार तिवारी समेत प्रशांत कुमार ओहदार दिनेश कुमार चौधरी प्रशिक्षु वन क्षेत्रपाल, सीएफओ राजेश कुमार यादव रमेश मंडावी लवकुश पांडेय राजू बेक सुनंदा सिंह ललिता मिंज त्रिभुवन सिंह अनुराग तिग्गा समेत वन अमला एवं ग्रामवासी मौजूद थे।
पुराना अनुभव आया काम
हाथी को सुरक्षित बाहर निकालने में पुराना अनुभव काम आया। सीतापुर के ही ढेलसरा गांव के नजदीक कुछ वर्ष पहले हाथी का एक बच्चा डबरीनुमा गड्ढे में गिर गया था। उसके दल के सदस्यों ने निकालने का प्रयास किया था लेकिन सफलता नहीं मिली थी। दिन के उजाले में वन विभाग की टीम ने एक्सीवेटर से गड्ढे के एक हिस्से को पाट कर हाथी के बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था । उस दौरान दल के दूसरे हाथी भी नजदीक ही बांस के झुरमुट में थे लेकिन उन्होंने रेस्क्यू आपरेशन में कोई बाधा उतपन्न नहीं की थी। यही अनुभव इस बार भी काम आया।वन विभाग की टीम को यह अनुमान था कि हाथी को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास शुरू होगा तो वह भी सहयोग करेगा क्योंकि उसे पता होगा कि जो प्रयास हो रहा है वह उसके प्राणरक्षा के लिए किया जा रहा है।
रुको थोड़ा मुझे कोशिश करने दो
हाथी एक सामाजिक प्राणी होता है। ऐसी घटनाओं में देखा गया है कि मुश्किल में फंसे हाथी, बचाव अभियान में शांत रहते हैं और उनका व्यवहार भी सहयोगात्मक रहता है। सोमवार को सरगा में गड्ढे से हाथी को बाहर निकालने जब एक्सीवेटर रास्ता बनाने के काम में लगा हुआ था, तब हाथी किनारे खड़ा हो गया था ताकि रेस्क्यू आपरेशन में उसके कारण दिक्कत ना आए। थोड़ी-थोड़ी देर में वह उस हिस्से में जाकर ऊपर चढ़ने का भी प्रयास करता था। एक्सीवेटर के सामने हिस्से में जाकर मानो यह कहता था कि रुको थोड़ा कोशिश करने दो। जब ऊपर चढ़ने में सफल नहीं होता था तो फिर किनारे आ जाता था। एक समय ऐसा आया जब मिट्टी कटाव हो जाने और गहराई कम होने पर हाथी ने प्रयास किया तो बाहर निकल गया। बाहर निकलने के बाद वह इंसानों की ओर नहीं बढ़ा। बल्कि तेजी से खेतों की ओर से होते हुए आगे निकल गया जबकि नजदीक में ही रेस्क्यू आपरेशन में लगा अमला भी मौजूद था ।
सुरक्षित जंगल में प्रवेश कर गया हाथी
डीएफओ अभिषेक जोगावत ने बताया कि भीड़ को पुलिस और वन बल की सहायता से नियंत्रित किया गया। चढ़ने हेतु रास्ता सुगम होने पर हाथी सुरक्षित गड्ढे से बाहर निकला।स्थानीय ट्रैकर और फील्ड स्टाफ द्वारा हाथी को सुरक्षित दो किलोमीटर दूर जंगल की तरफ रास्ता क्लियर करवाया गया और रास्ते में आने वाले गांव और ग्रामीणों को सचेत किया गया। हाथी सुरक्षित जंगल मे पहुंच गया है। आस पास के सभी बस्ती में रहने वाले ग्रामीणों को सचेत किया गया है और लगातार ट्रैकिंग की जा रही है।जंगली क्षेत्र से सटे गांवों में भी लोगों को जंगल से दूर रहने की सलाह दी जा रही हैं ।ताकि हाथी के हमले से होने वाले जानमाल के नुकसान से बचा जा सके।
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