मोबाइल कॉलर आईडी सुविधा मंजूर मार्च तक देशभर में लागू, उपयोगकर्ता को कॉल उठाने से पहले कॉलर का पता चलेगा





नयी दिल्ली। एजेंसी। मोबाइल फोन पर आने वाली कॉल में अब कॉल करने वाले व्यक्ति का असली नाम प्रदर्शित किए जाने को लेकर दूरसंचार नियामक ट्राई ने दूरसंचार विभाग के प्रस्ताव से सहमति जता दी है। कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम दिखाने की सुविधा (सीएनएपी) का दूरसंचार कंपनियों ने परीक्षण करना शुरू कर दिया है। उम्मीद है कि यह सुविधा देशभर में मार्च, 2026 तक लागू हो जाएगी। यह कदम फर्जी कॉल, डिजिटल गिरफ्तारी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी साइबर अपराध गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

केवल 4जी और 5 जी नेटवर्क पर ही मिलेगी सुविधा 

कॉल रिसीव करने वाले के फोन पर यह सुविधा डिफॉल्ट रूप से सक्रिय होगी

अधिकारियों का कहना है कि यह कदम फर्जी कॉल, डिजिटल गिरफ्तारी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराधों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हालांकि, सीएनएपी सुविधा केवल 4जी और 5जी नेटवर्क वाले फोन पर ही संभव होगी, क्योंकि 2जी और 3जी नेटवर्क में तकनीकी सीमाएं हैं। सरकार ट्राई की उस सिफारिश पर भी विचार कर रही है, जिसके तहत 'कॉलिंग लाइन पहचान निषेध' (सीएलआईआर) सुविधा लेने वाले उपभोक्ताओं का नाम प्रदर्शित नहीं किया जाएगा।

ट्राई की हरी झंडी के बाद मोबाइल कंपनियों ने सुविधा ट्रायल शुरू किया 
मोबाइल कॉलर आईडी सुविधा मंजूर  

अपराधों को रोकने में मिलेगी मदद

ट्राई ने फरवरी, 2024 में सौंपी सिफारिशों में कहा था कि सीएनएपी केवल इच्छुक उपभोक्ताओं को ही उपलब्ध कराई जाए लेकिन दूरसंचार विभाग का मानना था कि यह सेवा स्वचालित रूप से सभी को दी जानी चाहिए, ताकि धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर लगाम लगाई जा सके। अब ट्राई ने इसी विचार पर सहमति दी है। सूत्रों ने कहा कि अंतिम निर्णय के बाद दूरसंचार विभाग मोबाइल फोन विनिर्माताओं और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ समन्वय कर सीएनएपी सुविधा को छह महीने के भीतर लागू करने का खाका तैयार करेगा।

दूरसंचार विभाग देशभर में चरणबद्ध तरीके से इस सेवा को लागू करेगा

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