इस बार धान बेचने के लिए 26 लाख 49 हजार से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया है, जो पिछले सीजन की तुलना में लगभग 1 लाख अधिक है। यह संख्या राज्य में कृषि उत्पादन में वृद्धि और सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों के प्रति किसानों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
‘तुहर टोकन’ एप: छोटे-बड़े किसानों के लिए नई टोकन व्यवस्था
‘तुहर टोकन’ एप लॉन्च करने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय की बचत सुनिश्चित करना है। इस बार टोकन वितरण की एक नई व्यवस्था भी लागू की गई है:
छोटे किसान: इन्हें 2 टोकन जारी किए जाएंगे।
बड़े किसान: इन्हें 3 टोकन जारी किए जाएंगे।
यह व्यवस्था खरीदी केंद्रों पर भीड़ कम करने और खरीदी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से संपन्न करने में मदद करेगी। एप के आने से किसानों को टोकन के लिए केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, और पूरी प्रक्रिया मोबाइल पर ही पूरी हो जाएगी।यदि आपने धान खरीदी के लिए पहले से पंजीकरण किया है, तो आपका डेटा स्वतः एप से लिंक हो जाएगा।
चरण 1: एप डाउनलोड करें
9 नवंबर से अपने मोबाइल में Google Play Store या Apple App Store खोलें।
सर्च बार में “Tuhar Token CG” टाइप करके एप डाउनलोड और इंस्टॉल करें।
चरण 2: लॉगिन/रजिस्ट्रेशन करें
एप खोलने के बाद अपना मोबाइल नंबर और OTP डालें।सिस्टम के अनुसार आपको 2 या 3 टोकन जारी किए जाएंगे, जिसमें खरीदी केंद्र, तारीख और समय लिखा होगा।
चरण 3: जानकारी सत्यापित करें
एप में आपका नाम, पंजीकरण क्रमांक, ग्राम पंचायत और खरीदी केंद्र की जानकारी दिखाई देगी।
यदि कोई जानकारी गलत है, तो आप उसे संपादित (एडिट) या अपडेट कर सकते हैं।
चरण 4: टोकन प्राप्त करें
जानकारी सही होने पर “टोकन प्राप्त करें” बटन पर क्लिक करें।तुहर टोकन’ एप से टोकन प्राप्त करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
‘तुहर टोकन’ एप के माध्यम से पंजीकृत किसान आसानी से अपना टोकन प्राप्त कर सकते हैं।
आप टोकन को मोबाइल में सेव या प्रिंट कर सकते हैं।
चरण 5: खरीदी केंद्र पर टोकन के साथ जाएं
टोकन में दी गई तारीख और समय पर अपने खरीदी केंद्र पहुँचें।
खरीदी केंद्र में साथ रखने वाले आवश्यक दस्तावेज: किसान पंजीयन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति और धान की जानकारी।
टोकन केवल मान्यता प्राप्त पंजीकृत किसानों को ही मिलेगा और केंद्रों पर टोकन की तारीख का सख्ती से पालन होगा। किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर किसान खाद्य विभाग के हेल्पलाइन नंबर या पंचायत सचिव से मदद ले सकते हैं।
