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Chhattisgarh today news:
क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने हेतु लगभग 25 वर्ष पूर्व करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित राजाडेरा जलाशय रविवार की सुबह टूट गया, जिससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जलाशय के निर्माण के समय से ही कार्य में अनियमितता की शिकायतें सामने आती रही हैं,
लेकिन शासन-प्रशासन ने उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। बताया जा रहा है कि जलाशय के गेट के क्षतिग्रस्त होने के बाद भी केवल लीपापोती कर सुधार किया गया था। प्रारंभ से ही पानी का रिसाव जारी था, जिसे बंद करने पर बार-बार करोड़ों रुपये खर्च किए गए, पर समस्या बनी रही। रविवार को सुबह जलाशय के टेल एरिया के पास अचानक बांध का हिस्सा टूट गया,
बांध के टूटने से नालों में आई बाढ़, किसानों की फसल पर संकट मंडराया
25 वर्ष पूर्व करोड़ों रुपये की लागत से जलाशय का निर्माण
चिंता में किसान
बांध टूटने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों बेलरदोना, कोरगांव, शुक्लाभाठा, आमाचानी सहित अन्य इलाकों के ग्रामीण बड़ी संख्या में स्थल पर पहुंच गए। इस घटना से किसानों में चिंता व्याप्त है। ग्रामीणों ने बताया कि नाले के किनारे की धान की फसल पूरी तरह पक चुकी है, लेकिन मौसम खराबी के कारण कटाई में देरी हुई है। यदि पानी का स्तर बढ़ा तो हमारी मेहनत पानी में बह जाएगी।
क्या कहा एसडीओ ने
एसडीओ रविन्द्र कुंजाम ने बताया कि इस वर्ष अधिक वर्षा के कारण जलाशय में लगभग 32 फीट तक जल भराव हो गया था। 30 अक्टूबर को ऊपरी हिस्से में छोटे छिद्र दिखाई देने के बाद लगातार निगरानी रखी जा रही थी। रविवार सुबह यह छिद्र बड़ा हो गया और धीरे-धीरे पूरी संरचना धसक गई। लगभग 20 से 25 फीट तक बांध का हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह गया। जलाशय का जलस्तर 4 से 5 फीट तक नीचे आ गया है।" सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस बल को भी तैनात किया गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति बांध के समीप न जा सके।
जिससे नाले में बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित हो गई। कुछ दिनों पहले जलाशय के ऊपरी हिस्से में धसकन दिखाई दी थी, पर अचानक टूटने की किसी को उम्मीद नहीं थी।
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मगरलोड (छत्तीसगढ़)
