जिस बैरक में लगभग 40-50 पुलिस जवान रह रहे हैं, वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। न तो पंखों की व्यवस्था है, न ही पीने के पानी के उचित इंतजाम। शौचालयों की हालत भी बदतर है, जहां पानी उपलब्ध है, वहां बाल्टी मौजूद नहीं है, और जहां बाल्टी है, वहां पानी नहीं। पुलिसकर्मी मजबूरी में अपने मच्छरदानी के सहारे दिन-रात काटने विवश हैं। आम जनता की सुरक्षा में तैनात ये जवान खुद अव्यवस्था के बीच कठिन जीवन जीने पर मजबूर हैं। इसके बावजूद, मेला प्रबंधन समिति और संबंधित विभागीय अधिकारी इन हालात से बेखबर नजर आ रहे हैं।
पुलिस कर्मियों को ठहरने के लिए बड़े हॉल में व्यवस्था की गई है, इसके चारों ओर खुली खिड़कियां और केवल चैनल गेट लगे हैं। ऐसे में रात के समय ठंडी हवा और मच्छरों की भरमार उनकी नींद हराम कर रही है। इन परिस्थितियों में उनके लिए अपनी ड्यूटी कुशलतापूर्वक निभाना बेहद मुश्किल है। बैरक में रह रहे जवानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन समस्याओं के बावजूद वे किसी अधिकारी से शिकायत करने से डरते हैं, क्योंकि शिकायत करने पर दंड मिलने का डर रहता है। राजिम कुंभ मेला समिति और प्रशासन की गैर-जिम्मेदाराना रवैये का खामियाजा इन जवानों को भुगतना पड़ रहा है।
Tags
राजिम छत्तीसगढ़