सरस्वती शिशु मंदिर पूर्व माध्यमिक विद्यालय मोहरेंगा में 6 सितंबर को सरस्वती शिशु मंदिर का एक दिवसीय मगरलोड संकुल स्तरीय आचार्य आवर्ती वर्ग प्रशिक्षण हुआ। वक्ताओं ने शिक्षा के साथ संस्कारों को जरूरी बताया। अलग-अलग विषयों पर सत्र हुए।
शिक्षक लिखेश्वर ग्वाल ने राम, सीता, लक्ष्मण के वनवास प्रसंग से ज्ञान, क्रिया, धर्म का विवरण रखा। उन्होंने सीखने की प्रक्रिया को लगातार चलने वाला बताया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में मिली जानकारी को स्कूल में बच्चों के सामने रखें। बच्चों को इसका लाभ मिलेगा। वक्ताओं ने कहा कि यहां की शिक्षा में संस्कार पनपते हैं। आज के समय में संस्कार जरूरी हैं।
प्रार्थना और वंदना से जुड़ी त्रुटियां दूर करने पर काम हुआ। शुद्ध गायन, स्वर, लय की जानकारी दी गई। विद्यालय सह-गायन कराया गया। बेस्ड लर्निंग एक्टिविटी के जरिए पढ़ाने की विधि पर गतिविधि कराई गई। खेल, चित्र, वस्तु, कविता से लेटर, वर्ड, सेंटेंस पर अभ्यास कराया गया। इसे स्कूल में नियमित चलाने पर जोर दिया गया। पर्यावरण विषय पर खेल-खेल में गतिविधियों से जानकारी दी गई। अनुभव और स्पर्श आधारित विषय-वस्तु समझाई गई। बच्चों को वस्तुओं की पहचान कराने की बात कही गई। जीव-जंतुओं की एक्टिंग, उनकी आवाज निकालने जैसी गतिविधियां भी कराई गईं।
अंत में 9 सितंबर को रांकाडीह में होने वाले सरस्वती शिशु मंदिर के बौद्धिक-सांस्कृतिक महोत्सव की रूपरेखा बताई गई। मूर्तिकला, चित्रकला, एकल गान, सुलेख समेत अन्य विधाओं में भाग लेने की प्रक्रिया और नियम समझाए गए। वक्ताओं में डुमेश सोनी, बिसहत पटैल, लिखेश्वर ग्वाल, भूपेन्द्र नागरची शामिल रहे। कार्यक्रम में संकुल समन्वयक चेलाराम पटेल, प्रधानाचार्य शंकर लाल साहू, मेघा नूतन साहू, कौशल साहू, रूपेश साहू, संतू निषाद, गोविंद निषाद, करेली बड़ी से नूतन साहू, रामसिंग ध्रुव, जागेश्वर कश्यप, वेदराम सिन्हा, प्रकाश साहू सहित बड़ी संख्या में आचार्य मौजूद रहे।
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