नवाचार से बदल रही स्कूल की तस्वीर


बच्चे खुद बनाते हैं सवाल और तलाशते हैं जवाशिक्षिका कल्पना रात्रे को मिला शिक्षा दूत सम्मान। 

मगरलोड। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर उठने वाले सवालों के बीच मगरलोड विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला बस्तीपारा खिसोरा की सहायक शिक्षक कल्पना रात्रे अपने नवाचारी प्रयोगों के जरिए बच्चों की पढ़ाई को नया स्वरूप दे रही हैं। उनके प्रयासों से विद्यालय में बच्चों के सीखने की प्रक्रिया केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे स्वयं सवाल तैयार कर उनके जवाब तलाशने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कल्पना रात्रे बच्चों को पारंपरिक तरीके से पढ़ाने के बजाय गतिविधि आधारित और नवाचारी शिक्षण पद्धति को प्राथमिकता देती हैं। उनके मार्गदर्शन में बच्चे कहानी पढ़ने के बाद उसमें से स्वयं प्रश्न तैयार करते हैं और फिर पाठ को समझकर उसके उत्तर खोजने का प्रयास करते हैं। इस प्रक्रिया से बच्चों में विषय को समझने, सोचने और अपने विचार व्यक्त करने की क्षमता
पखवाड़ा के अंतर्गत जिला स्तरीय विकसित हो रही है। 

विद्यालय में किए जा रहे इन प्रयासों का असर बच्चों के सीखने के स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। विद्यालय के बच्चे अंक ज्ञान और अक्षर ज्ञान को बेहतर ढंग से पढ़ने-लिखने में सक्षम हो रहे हैं। शिक्षिका का प्रयास बच्चों को केवल उत्तर याद कराने के बजाय उन्हें स्वयं उत्तर तक पहुंचने के लिए प्रेरित करना है। कल्पना रात्रे के नवाचारी शिक्षण प्रयोगों को विभिन्न स्तरों पर सराहना मिली है। बच्चों के लिए किए गए नवाचारों के लिए उन्हें शासन के विनोबा एप पर भी कई बार पुरस्कृत किया जा चुका है। उनके शैक्षणिक कार्यों और नवाचारी प्रयासों को देखते हुए उन्हें धमतरी जिले से प्रतिष्ठित शिक्षा दूत पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। सरपंच राखी साहू उपसरपंच इंदु पटेल, शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष खेमराज साहू, प्रधान पाठक साधना साहू, शिक्षक हरीराम साहू, कुंदन लाल सिरदार, कुमारी देहुती पटेल सहित शिक्षकों और ग्रामीणों ने कल्पना रात्रे को बधाई दी है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई के साथ सोचने और स्वयं सीखने के अवसर मिल रहे हैं। ऐसे प्रयासों से सरकारी स्कूलों में शिक्षा को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों का भरोसा मजबूत हो रहा है।

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