नवभारत ब्यूरो। जगदलपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के खतरे से मुक्त होकर अब तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर दशहरा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी युवा देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लेंगे। वहीं ऐतिहासिक मुरिया दरबार में राष्ट्रपति ने नक्सल मुक्त बस्तर में शिक्षा, सामाजिक एकता और जनजातीय परंपराओं के संरक्षण को प्राथमिकता देने का आह्वान
धान: सिरहासार
किया। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों को अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए और विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान, रीति-रिवाजों तथा परंपराओं को भी सुरक्षित रखना चाहिए। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा- 'मैं भी मांझी की बेटी हूं, मेरे दादाजी और पिताजी मांझी थे।' उनके इस कथन ने जनजातीय
23 अक्टूबर 2026
समाज की पारंपरिक व्यवस्था से उनके आत्मीय जुड़ाव को रेखांकित किया। राष्ट्रपति ने मुरिया दरबार को सामाजिक न्याय, आपसी संवाद, सहमति और सामूहिक निर्णय की अनूठी परंपरा बताते हुए कहा कि मांझी, पीड़ परगना और देश परगना जैसी संस्थाओं ने पीढ़ियों से समाज को जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। >> शेष पेज 8 पर
सम्पु जगदलपुर में बस्तर दशहरा कार्यक्रम को किया संबोधित
बस्तर दशहरा एकजुटता का संदेश देता है : राज्यपाल
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि बस्तर दशहरा समाज को मिल-जुलकर आगे बढ़ने की सीख देता है। रथ के लिए लकड़ी लाने से लेकर उसके निर्माण और संचालन तक लोग अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।
विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा बस्तर : सीएम
सीएम साय ने कहा कि बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन क्षेत्र की कला, संस्कृति और प्रतिभाओं को नई पहचान दे रहे हैं।