शिक्षक साझा मंच ने बीईओ कुरूद की कार्यशैली के खिलाफ एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। मंच ने 4 सूत्रीय मांगों के साथ बीईओ को हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि बीईओ ने युक्तियुक्तकरण में शासन के नियमों को नजरअंदाज कर मनमानी की। 2008 सेटअप के अनुसार क्रमोन्नति और पेंशन की मांग की जा रही है। मंच का कहना है कि बीईओ ने अपने मौखिक निर्देशों से ऐसे स्कूलों को भी युक्तियुक्तकरण में शामिल किया, जो एक परिसर में नहीं हैं। इससे शिक्षकों को मानसिक रूप से परेशान किया गया।
कुरूद के 4 स्कूलों से अंग्रेजी व्याख्याताओं को हटाया गया, जबकि धमतरी, नगरी और मगरलोड में समान स्थिति में ऐसा नहीं किया गया। शासन का निर्देश है कि शिक्षकविहीन स्कूलों में शिक्षक भेजे जाएं, लेकिन कुरूद के एक स्कूल से गणित, जीवविज्ञान और संस्कृत के सभी व्याख्याताओं को हटा दिया गया। वहां करीब 300 विद्यार्थी पढ़ते हैं, लेकिन अब कोई शिक्षक नहीं है। ब्लॉक में पद होने के बावजूद शिक्षकों को अन्य जिलों में भेजा गया। कुछ सहायक शिक्षिकाओं को ब्लॉक में पद होने के बावजूद अन्य ब्लॉक में स्थानांतरित किया गया। हाल ही में कुछ शिक्षकों ने दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया, लेकिन वरिष्ठ शिक्षकों को अतिशेष बनाकर उन्हें प्राथमिकता दी गई, जबकि नियम के अनुसार प्रारंभ से दिव्यांग शिक्षकों को राहत मिलनी चाहिए।
शिक्षक संगठनों ने पहले भी विधायक अजय चंद्राकर, जनप्रतिनिधियों, कलेक्टर, संभागायुक्त और मुख्यमंत्री को बीईओ को हटाने की मांग की थी। अब फिर से बीईओ की मनमानी और शिक्षकों को हताश करने की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया गया। धरने में प्रवक्ता हुलेश चंद्राकर, ब्लॉक संचालक हुमन चंद्राकर,
दिनेश साहू, लुकेश राम साहू, पुरुषोत्तम निषाद, राम दयाल साहू, फालेश्वर कुर्रे, मिथलेश कंवर, मनीष देव वर्मा, हेमलाल साहू, लिलेश्वर ग्वाल, शिप्रा जन्नोजे, वर्षा केला, भावना द्विवेदी, वासंती देवांगन, उषा लहरे, उषा साहू, मधु दीवान, मीरा चंद्राकर, देव नारायण ध्रुव, नवनीत चंद्राकर, ममता वारर्दे, चंद्रहास देवांगन, लक्ष्मीनाथ जोशी, ताराचंद्र साहू, संजय साहू, खिलेश्वर साहू, अभिषेक सिंह, शंकरदास मानिकपुरी, कोमल साहू, अश्वनी सिन्हा, भुवन बैस, घनश्याम कौशिक, खिलेश्वर साहू, गोपीलाल चंद्राकर, ईश्वर यादव सहित कई शिक्षक शामिल हुए।
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