सावन के तीसरे सोमवार को भूतेश्वरनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की ऐतिहासिक भीड़ उमड़ी। सुबह 5 बजे से जलाभिषेक और पूजन शुरू हुआ। 8 बजे तक मंदिर परिसर खचाखच भर गया। पैर रखने की जगह नहीं बची। इसके बाद भी लोगों ने किसी तरह जल अर्पण किया। थोड़ी देर में मंदिर प्रांगण पूरी तरह भर गया। कुछ समय के लिए अव्यवस्था भी बनी रही।
करीब 25 हजार श्रद्धालु पहुंचे। इनमें 10 हजार से ज्यादा कांवरिए शामिल थे। भूतेश्वरनाथ शिवलिंग की महिमा लगातार बढ़ रही है। पिछले दो-तीन वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या दो से तीन गुना तक बढ़ गई है। अत्यधिक भीड़ और भारी वाहनों के कारण मंदिर मार्ग पर लंबा जाम लग गया। पारागांव और गरियाबंद के बीच सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दो हजार से अधिक वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग कुछ ही घंटों में भर गई। दूर-दराज जिलों से आए श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई श्रद्धालु पहली बार पहुंचे थे, भीड़ देखकर हैरान रह गए। वाहनों को दो से तीन किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया। श्रद्धालुओं को तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर दर्शन करने पड़े। बुजुर्ग बड़ी मुश्किल से चलकर मंदिर पहुंचे।
कांवड़ यात्रा में भी जबरदस्त उत्साह दिखा। राजिम से गरियाबंद तक 45 किलोमीटर सड़क पर रविवार और सोमवार को कांवड़ियों का जत्था नजर आया। सड़क भगवामय हो गई। पहली बार कांवड़ियों में इतनी भक्ति भावना दिखी। 40-50 किलोमीटर नंगे पैर चलने के बाद भी उत्साह कम नहीं हुआ। बोल बम और हर हर महादेव के नारे गूंजते रहे। महिला, बच्चे और बुजुर्ग भी बाजे-गाजे और डीजे की धुन पर थिरकते नजर आए। सूत्रों के अनुसार रविवार को ही 10 हजार से अधिक कांवड़िए पहुंच चुके थे।