लगातार हो रही बारिश से गंगरेल बांध का जलस्तर 94% तक पहुँचा, प्रशासन ने जारी की चेतावनी

धमतरी। प्रदेशभर में जारी भारी वर्षा का असर अब जलाशयों और नदियों पर साफ दिखाई देने लगा है। धमतरी जिले के प्रसिद्ध रविशंकर सागर बांध (गंगरेल बांध) का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। शनिवार सुबह 11 बजे की स्थिति में बांध का जलभराव 94 प्रतिशत तक पहुँच चुका है।

कैचमेंट क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते बांध में वर्तमान में 15 हजार क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो आने वाले घंटों में यह आवक बढ़कर 25 हजार क्यूसेक तक पहुँच सकती है।

जल स्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए बांध प्रबंधन और जिला प्रशासन ने पानी छोड़े जाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रारंभिक चरण में लगभग 4 हजार क्यूसेक पानी एक-एक घंटे के अंतराल में धीरे-धीरे नदी में छोड़ा जाएगा ताकि अचानक जलप्रवाह बढ़ने से किसी भी प्रकार की दुर्घटना या नुकसान न हो।

प्रशासन ने लोगों को किया सतर्क


धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने स्थिति पर नज़र बनाए रखते हुए नदी किनारे बसे गाँवों के निवासियों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में चौकसी बरती जाए और समय रहते ग्रामीणों को सचेत किया जाए।

कलेक्टर ने कहा –

“नदी किनारे रहने वाले परिवार सावधानी बरतें। प्रशासन की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन करें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। पानी छोड़े जाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, लोगों को बांध और नदी किनारे अनावश्यक रूप से जाने से बचना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि लोग समय पर एहतियात बरतेंगे तो किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सकता है।



गाँवों में बढ़ी चिंता


बांध से पानी छोड़े जाने की खबर के बाद नदी किनारे बसे धमतरी, नगरी, कुरूद और आसपास के गाँवों में चिंता का माहौल है। किसानों को डर है कि यदि नदी का जलस्तर बढ़ा तो खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, नदी किनारे बने घरों में रहने वाले लोग सतर्कता बरतते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी करने लगे हैं।

कई ग्रामीणों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि उन्हें पहले से सूचना दी जाए ताकि मवेशियों और घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सके।


गंगरेल बांध: प्रदेश की जीवनरेखा


रविशंकर सागर बांध, जिसे आमतौर पर गंगरेल बांध कहा जाता है, छत्तीसगढ़ का सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देश्यीय जलाशय है। इसका निर्माण वर्ष 1979 में पूरा हुआ था। यह बांध महानदी नदी पर स्थित है और धमतरी जिले के गंगरेल गांव के पास बना हुआ है।


बांध की लंबाई: लगभग 1,830 मीटर


  • ऊँचाई: 45 मीटर

  • भंडारण क्षमता: करीब 910 मिलियन क्यूबिक मीटर

  • जलाशय क्षेत्रफल: 95 वर्ग किलोमीटर


गंगरेल बांध का निर्माण मुख्य रूप से सिंचाई और बिजली उत्पादन के उद्देश्य से किया गया था। इसके माध्यम से धमतरी, महासमुंद, रायपुर और बलौदाबाजार जैसे जिलों के लाखों हेक्टेयर खेतों में सिंचाई होती है।

इसके अलावा, यह बांध 10 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना से बिजली भी पैदा करता है। गंगरेल जलाशय रायपुर और दुर्ग जैसे बड़े शहरों की पीने के पानी की आपूर्ति का भी प्रमुख स्रोत है।

पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध


गंगरेल बांध न केवल सिंचाई और बिजली का महत्वपूर्ण केंद्र है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, विशाल जलराशि और हरे-भरे जंगल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

बांध के पास मुंदुला रिसॉर्ट और बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य जैसे पर्यटन स्थल भी स्थित हैं, जो इसे और अधिक खास बनाते हैं। सर्दियों के मौसम में यहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी भी दिखाई देते हैं, जो पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।


बारिश का असर और आगे की स्थिति


मौसम विभाग के अनुसार, धमतरी और आसपास के जिलों में अभी अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है। ऐसे में गंगरेल बांध का जलस्तर और अधिक बढ़ सकता है।

बांध से धीरे-धीरे पानी छोड़े जाने के बावजूद महानदी का जलस्तर बढ़ने की पूरी संभावना है। यही वजह है कि प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है और राजस्व, पुलिस तथा जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को अलर्ट पर रखा गया है।


विशेषज्ञों की राय


जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों का कहना है कि गंगरेल बांध की क्षमता काफी अधिक है और फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है। पानी छोड़ा जाना एक नियमित प्रक्रिया है, ताकि बांध सुरक्षित बना रहे और अत्यधिक दबाव न बने।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश का दौर लंबा खिंचता है तो स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में पहले से की गई तैयारी ही जनहानि और नुकसान को रोक सकती है।


निष्कर्ष


लगातार हो रही वर्षा से प्रदेश के प्रमुख बांधों में पानी तेजी से भर रहा है और गंगरेल बांध इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। प्रशासन की ओर से समय रहते चेतावनी जारी कर दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

गंगरेल बांध सिर्फ धमतरी जिले के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की सिंचाई, बिजली और पेयजल आपूर्ति का मुख्य आधार है। इसलिए इसका सुरक्षित रहना और जलस्तर का नियंत्रित प्रबंधन पूरे राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

लोगों से अपील है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, नदी किनारे जाने से बचें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। सावधानी और सतर्कता ही इस समय सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

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