छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती परीक्षा में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस बार मामला जाति प्रमाणपत्र से जुड़ा है, जहां एक अभ्यर्थी ने साक्षात्कार के समय मूल स्थायी जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया, बावजूद इसके उसे मेरिट सूची में चयनित कर लिया गया। इस चयन को दिग्विजय दास सिरमौर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
जानिए पूरा मामला
याचिकाकर्ता दिग्विजय दास सिरमौर ने अपनी याचिका में कहा है कि विज्ञापन की शर्तों के अनुसार, उम्मीदवार को साक्षात्कार के समय एसडीएम द्वारा जारी स्थायी जाति प्रमाणपत्र की मूल प्रति प्रस्तुत करनी अनिवार्य थी।
चयनित उम्मीदवार प्रदीप कुमार सोनकर ने न तो साक्षात्कार के समय मूल जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया और न ही बाद में कोई मान्य प्रमाणपत्र दिया।
इस पर हाईकोर्ट ने CGPSC को नोटिस जारी कर पूरा रिकॉर्ड और नोटशीट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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हाईकोर्ट की कार्रवाई
• आयोग को नोटिस जारी: जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की बेंच ने CGPSC से पूछा है कि प्रदीप कुमार सोनकर ने साक्षात्कार के समय मूल स्थायी जाति प्रमाणपत्र दाखिल किया था या नहीं।
• मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
इस मामले में CGPSC की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, और हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब आयोग को अपना रिकॉर्ड पेश करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं.

