MP News|ग्वालियर में कीटनाशक से निकली गैस से बीमार 13 साल की क्षमा शर्मा ने भी दम तोड़ दिया। मंगलवार सुबह ग्वालियर के रिम्स अस्पताल में उसने आखिरी सांस ली। इससे पहले सोमवार को क्षमा के छोटे भाई वैभव की मौत हो गई थी।
माता-पिता की हालत भी नाजुक है। दोनों को रिम्स हॉस्पिटल से न्यू जेएएच हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है।
घटना सोमवार को गोला का मंदिर इलाके में प्रीतम विहार कॉलोनी की है। यहां घर के पोर्च में रखे गेहूं को घुन से बचाने के लिए मकान मालिक ने सल्फास से बने कीटनाशक का छिड़काव किया था। फिर घर के सारे सदस्य दरवाजे बंद कर सोने चले गए थे।
पोर्च के सामने दो कमरों में किराए से रहने वाला सत्येंद्र शर्मा का परिवार इस कीटनाशक से बनी जहरीली गैस का शिकार हो गया। मकान मालिक श्रीकृष्ण यादव तीसरी मंजिल पर रहता था, जो घटना के बाद से फरार है।
बदबू आने पर देखा तो पूरा परिवार बेहोश पड़ा था
सोमवार दोपहर जब मकान मालिक श्रीकृष्ण नीचे आया तो बदबू फैली हुई थी। उसने देखा कि किरायेदार सत्येंद्र शर्मा (51), उनकी पत्नी रजनी, बेटी क्षमा (13) और बेटा वैभव उर्फ करुआ (4 साल) बेहोश थे। जिसके बाद उसने पड़ोसियों की मदद से सभी को हॉस्पिटल पहुंचाया। यहां वैभव को मृत घोषित कर दिया गया था।
पांच बहनों के बाद मन्नत से हुआ था वैभव का जन्म
रिश्तेदारों ने बताया कि पांच बेटियों के बाद कई मंदिरों में मन्नत मांगी, तब जाकर 46 साल की उम्र में सत्येंद्र को बेटा हुआ था। उनकी दो बेटियों की बचपन में ही मौत हो गई थी। बड़ी बेटी भारती और दीपा की शादी हो चुकी है। सबसे छोटी बेटी क्षमा उनके साथ रहती थी।
दीदी-जीजा ने खाना बनाया, खाया और सो गए
सत्येंद्र के साले रामू शर्मा ने बताया- जीजाजी और दीदी रविवार को कहीं गए थे। शाम को घर लौटकर खाना बनाया, खाया और सो गए। हमारा घर पास ही है, लेकिन मकान मालिक ने हमें घटना की जानकारी नहीं दी।
सूचना मिली तो हम करीब 10.30 बजे उनके घर पहुंचे, तब तक मकान मालिक सत्येंद्र और उनकी पत्नी को हॉस्पिटल रवाना कर चुका था।
चारों तरफ बदबू फैली हुई थी। अंदर जाते ही सिर चकराने लगा, इसलिए हमने मुंह पर कपड़ा बांधा। दो-दो पट्टे बांधने के बाद भी चक्कर आ रहे थे। बिटिया क्षमा अंदर थी, उसे हमने बाहर निकाला। वह बोल तो रही थी, लेकिन उसका ब्लड प्रेशर काफी लो था।
वैभव उस वक्त तीसरी मंजिल पर था। हमने क्षमा और वैभव को अस्पताल में भर्ती कराया।

