मेघा 108 एम्बुलेंस दुर्घटना: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में घायलों के लिए चौबीस घंटे की दौड़ वाली संजीवनी 108 खुद एक बड़ी सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई। मगलोड सोशल हेल्थ सेंटर के यह सचिव देर रात ग्राम मेघा में पेट्रोल पंप के पास की सड़क के बीच-बीच में डिवाइडर पर अचानक जा चढ़ाया गया। यह हादसा उस वक्त हुआ जब प्रोफेसर कुरुद का एक मरीज अस्पताल से ठीक होकर मगरलोड सेंटर की तरफ लौट रहा था। डिवाइडर में टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्पीकर का सामने वाला हिस्सा और कांच पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि दुर्घटना के वक्त गाड़ी में कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था और गाड़ी में सवार डॉक्टर और ड्राइवर दोनों पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
हादसा हुआ ही मेघा पेट्रोल पंप पर मच गया हादसा। वहां के इंजीनियर कर्मचारियों ने तेज आवाज में बिना वक्त गंवाए मशीन पर दौड़ लगाई। कर्मचारियों और आसपास के शेयरधारकों ने तुरंत सचिव के अंदर के ड्राइवर और डॉक्टर को सुरक्षित बाहर निकाल दिया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने बुलावे पर निजी निजी क्रेन चालकों से संपर्क किया। काफी संकट के बाद स्पाइराइस को डिवाइडर के ऊपर से ज्वालामुखी सड़क का किनारा दिया गया, जिसके बाद यह मुख्य मार्ग पर यातायात व्यवस्था सामान्य हो गई।
लोक निर्माण विभाग की बड़ी प्रतिस्पर्धा सामने है, रेडियम और स्टॉक लगातार खत्म हो रहे हैं
इस दुर्घटना में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से गंभीर प्रश्न पूछे गए हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विभाग द्वारा सड़क के बीच में इतना बड़ा डिवाइडर बनाया गया है, लेकिन वाहनों की रजिस्ट्री के लिए वहां कोई पंजीकरण बोर्ड नहीं लगाया गया है। इसके अलावा रात के अंधेरे में दूर से देखने के लिए रेडियम स्ट्रिप्स की भी आवश्यकता होती है। रिबूट का कहना है कि इस मार्ग पर यह कोई पहली दुर्घटना नहीं है, बल्कि घटिया सुरक्षा परत न होने की वजह से पहले भी कई चार पहिये वाले वाहन यहां दुर्घटनाओं का शिकार हो गए हैं।
महानदी पुल निर्माण और रपटा मार्ग से भयानक मुसीबतें, रात के अंधेरे में जान जोखिम में दल रहे चालक
चल रहे विकास श्रमिकों की वजह से भी वाहनों का चयन मुश्किल क्षेत्रों में हो गया है। वर्तमान में महानदी पर नये पुल का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके कारण मुख्य मार्ग को बंद कर दिया गया है, जिससे नीचे बने रपटा (अस्थयी) मार्ग को भारी पत्थरों से मोड़ दिया गया है। इस वैकल्पिक मार्ग पर प्रशासन द्वारा रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे पूरी नदी में रात के समय घना अंधेरा पसर जाता है। प्रशासन को चाहिए कि वे महानदी मार्ग पर नासा के लिए पर्याप्त साबुत लाइटें और सुरक्षा की तलाश करें ताकि भविष्य में ऐसे अवशेषों को खरीदा जा सके।
Bhiya ji likhte waqt dhyan dijiye kya likh rahe hai, bahut mistek hai isme
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