कुरूद (प्रखर)। कॉलेज और विश्वविद्यालय की लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को किस तरह भुगतना पड़ सकता है, इसका हैरान करने वाला मामला कुरूद के संत गुरु घासीदास शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सामने आया है। बीए चतुर्थ सेमेस्टर के जिस विषय की परीक्षा प्रश्नपत्र के नहीं पहुंचने के कारण हुई ही नहीं, विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणाम में उसी विषय में 14 विद्यार्थियों को अनुपस्थित दर्शाकर एटीकेटी दे दी गई। इतना ही नहीं, कला संकाय के विद्यार्थियों की अंकसूची में बीकॉम का विषय दर्ज कर दिया गया। अब इन विद्यार्थियों के सामने पांचवें सेमेस्टर में प्रवेश और शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने का संकट खड़ा हो गया है। मामला सामने आने के बाद विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय मुख्यालय पहुंचकर कुलपति और सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा। विद्यार्थियों ने डीएसई-मनी एंड बैंकिंग की दोबारा परीक्षा कराने, संशोधित अंकसूची जारी करने तथा पांचवें सेमेस्टर में प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। परीक्षा के दिन नहीं पहुंचा
प्रश्नपत्र
विश्वविद्यालय की मई-जून 2026 सेमेस्टर परीक्षा समय-सारणी के अनुसार बीए चतुर्थ सेमेस्टर के अर्थशास्त्र विषय में डीएसई-मनी एंड बैंकिंग की परीक्षा 6 जुलाई को निर्धारित थी। विद्यार्थी परीक्षा देने के लिए निर्धारित केंद्र पहुंचे, लेकिन प्रश्नपत्र ही नहीं पहुंचा। इसके चलते परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि घटना की लिखित जानकारी 7 जुलाई को विश्वविद्यालय को दे दी गई थी। बावजूद इसके परिणाम जारी करते समय विद्यार्थियों को अनुपस्थित दर्शा दिया गया।
21 अगस्त को रिजल्ट देखकर उड़े होश 21 अगस्त को विश्वविद्यालय ने परीक्षा परिणाम जारी किया तो विद्यार्थियों के होश उड़ गए। जिस परीक्षा का आयोजन ही नहीं हुआ, उसी में विद्यार्थियों को अनुपस्थित बताकर एटीकेटी दे दी गई। विद्यार्थियों का कहना है कि समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। बीए के विद्यार्थियों की मार्कशीट में संबंधित विषय की जगह बीकॉम संकाय का विषय प्रदर्शित किया गया है। छात्रों के अनुसार उन्होंने बीकॉम का कोई विषय नहीं चुना था पाठ्यक्रम पढ़ाने का आरोप
विद्यार्थियों ने कॉलेज की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चतुर्थ सेमेस्टर में उन्हें छठवें सेमेस्टर का पाठ्यक्रम पढ़ाया गया। परीक्षा की तारीख आने पर जब प्रश्नपत्र नहीं पहुंचा, तब कथित तौर पर कॉलेज प्रबंधन को पाठ्यक्रम संबंधी गड़बड़ी का पता चला। यदि विद्यार्थियों के आरोप सही हैं तो सवाल उठता है कि पूरे सेमेस्टर के दौरान पाठ्यक्रम की निगरानी किस स्तर पर हुई। और यदि पाठ्यक्रम में गलती थी तो उसी विषय की परीक्षा के लिए विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र कैसे जारी हुए? नई शिक्षा नीति के तहत बीए विद्यार्थियों को जेनेरिक इलेक्टिव के अंतर्गत बीकॉम के एक विषय का चयन कर अध्ययन करना था। विद्यार्थियों का आरोप है कि संबंधित विषय के पाठ्यक्रम को लेकर कॉलेज स्तर पर गंभीर चूक हुई। हालांकि कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ने छठवें सेमेस्टर का पाठ्यक्रम पढ़ाने के आरोप का खंडन किया है।
जांच कमेटी गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर जांच कराने की बात कही है। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया है कि मामले में छात्रहित को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय लिया जाएगा।
क्या कहते हैं प्राचार्य
जेनेरिक इलेक्टिव के तहत 14 परीक्षार्थियों ने डीएसई-मनी एंड बैंकिंग विषय चुना था। इसकी परीक्षा 6 जुलाई को होनी थी, लेकिन विश्वविद्यालय ने प्रश्नपत्र नहीं भेजा। 7 जुलाई को पत्राचार कर विश्वविद्यालय को इसकी जानकारी दी गई थी। विश्वविद्यालय द्वारा जारी परीक्षा परिणाम में विद्यार्थियों को अनुपस्थित दिखाते हुए एटीकेटी
दिया गया है। डॉ. आर.के. पांडेय प्रभारी प्राचार्य, कुरूद कॉलेज
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