धमतरी के रास गांव में अनोखा दशहरा: रावण दहन नहीं, सहस्त्रबाहु की प्रतिमा का खड्ग से होता है वध

 धमतरी के रास गांव में अनोखा दशहरा: रावण दहन नहीं, सहस्त्रबाहु की प्रतिमा का खड्ग से होता है वध


धमतरी। छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति और अनूठी धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। इसी सांस्कृतिक विरासत की एक खास पहचान धमतरी जिले के सिहावा क्षेत्र का भीतर रास  गांव है। यहां दशहरे का आयोजन परंपरागत तरीके से अलग अंदाज में किया जाता है। आमतौर पर विजयादशमी के दिन रावण दहन होता है, लेकिन रास गांव में एकादशी के दिन सहस्त्रबाहु की प्रतिमा का खड्ग से वध करने की परंपरा निभाई जाती है।


एकादशी के दिन उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़


रास गांव में दशहरा उत्सव को देखने के लिए आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। सुबह से ही गांव में धार्मिक उत्साह और चहल-पहल का माहौल रहता है। यहां का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों, धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय लोक संस्कृति के अनुसार संपन्न होता है।


सहस्त्रबाहु की प्रतिमा का खड्ग से वध


इस अनूठे दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण सहस्त्रबाहु की प्रतिमा का वध है। स्थानीय कुम्हारों द्वारा विशेष रूप से प्रतिमा तैयार की जाती है। मंदिर के पुजारी मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ खड्ग से प्रतिमा का वध करते हैं। इस अनुष्ठान को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहते हैं।


प्रतिमा की मिट्टी को पवित्र मानने की परंपरा


प्रतिमा के वध के बाद उसकी मिट्टी को प्राप्त करने के लिए लोगों में उत्साह देखा जाता है। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मिट्टी को पवित्र माना जाता है। लोग इसे अपने घर ले जाते हैं और तिलक के रूप में उपयोग करते हैं। जहां दूसरे स्थानों पर दशहरे के दौरान सोनपत्ती बांटने की परंपरा प्रचलित है, वहीं रास गांव में मिट्टी के तिलक की विशेष परंपरा देखने को मिलती है।


शीतला माता की पूजा और चांदमारी भी है खास


रास गांव के दशहरा आयोजन में शीतला माता की आराधना के साथ अन्य पारंपरिक गतिविधियां भी होती हैं। इनमें चांदमारी की परंपरा विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, सिहावा मठ के प्रभारी को राजा के रूप में प्रतिष्ठित किया जाता है। आयोजन में गांव के विभिन्न टोले के लोग भी सहयोग करते हैं।


पीढ़ियों से सहेजी जा रही सांस्कृतिक विरासत


रास गांव का दशहरा छत्तीसगढ़ की लोक आस्था और प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा उदाहरण है। यहां रावण दहन के स्थान पर सहस्त्रबाहु की प्रतिमा का वध और उसके बाद मिट्टी का तिलक लगाने की परंपरा इस आयोजन को विशिष्ट बनाती है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा के माध्यम से ग्रामीण अपनी सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक विरासत को संजोए हुए हैं।


धमतरी जिले के सिहावा क्षेत्र का रास गांव इस अनोखे दशहरे के कारण विशेष पहचान रखता है। यहां का आयोजन दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में दशहरा पर्व स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार विविध रूपों में मनाया जाता है।

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