धमतरी: कहते हैं कि कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती. धमतरी जिले के मगरलोड के रहने वाले देवव्रत सिन्हा इसकी मिसाल बनकर उभरे हैं. किसान परिवार से आने वाले देवव्रत ने बीटेक की पढ़ाई के बाद किसी बड़ी कंपनी में नौकरी या सरकारी पद की दौड़ में शामिल होने का नहीं सोचा. उन्होंने इसके बजाय तकनीक की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने का रास्ता चुना.
एआई और आईटी गुरु बने देवव्रत
देवव्रत सिन्हा ने घर पर रहकर खुद नई-नई तकनीकें सीखीं और अब उसी ज्ञान को स्कूली बच्चों तक पहुंचाने में जुटे हैं. रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), मशीन लर्निंग, कोडिंग, ड्रोन तकनीक और 3D प्रिंटिंग जैसे विषयों पर काम करने वाले देवव्रत स्टेम रोबो हब इंडिया के संस्थापक हैं. उनका मकसद बच्चों को केवल किताबों में तकनीक के बारे में पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें अपने हाथों से प्रयोग करने, मॉडल बनाने और नई चीजें विकसित करने के लिए प्रेरित करना है.
इंजीनियरिंग के बाद नौकरी नहीं, टेक गुरु का रास्ता चुना
देवव्रत सिन्हा बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान उनकी बीटेक की पढ़ाई हुई. इसके बाद उन्होंने खुद से आधुनिक तकनीकों को समझना और उन पर काम करना शुरू किया. धीरे-धीरे रोबोटिक्स, IoT, मशीन लर्निंग, AI और वेबसाइट डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में अपनी रुचि को काम में बदल दिया. परिवार की इच्छा थी कि वह सरकारी नौकरी की तैयारी करें, लेकिन देवव्रत की सोच कुछ अलग थी. उनका मानना है कि सरकारी नौकरी जरूरी है, लेकिन देश को आगे बढ़ाने के लिए तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में भी युवाओं का आगे आना उतना ही आवश्यक है.
अगर सभी लोग सरकारी नौकरी के पीछे ही भागते रहेंगे, तो टेक्नोलॉजी के पीछे कौन जाएगा? देश को आगे बढ़ाना है, तो हमें नई तकनीकों पर भी काम करना होगा. मेरा सपना है कि धमतरी जिले में एक नहीं, बल्कि हजारों ऐसे युवा तैयार हों, जो तकनीक के क्षेत्र में काम करें और उनसे भी बेहतर उपलब्धियां हासिल करें-देवव्रत सिन्हा, युवा टेक्नोलॉजी इनोवेटर
स्कूली बच्चों को बता रहे भविष्य की तकनीक
देवव्रत के प्रयासों की खास बात यह है कि वे आधुनिक तकनीक का ज्ञान केवल अपने तक सीमित नहीं रखना चाहते. वे स्कूलों में जाकर बच्चों को रोबोटिक्स, कोडिंग, 3D प्रिंटिंग, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में बताते हैं. सरकारी स्कूलों में भी वे कई बार कैंप आयोजित कर चुके हैं. उनका कहना है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें 3D प्रिंटर जैसी तकनीक के बारे में जानकारी मिली. इसी अनुभव ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि अगर उन्हें इन तकनीकों के बारे में पहले पता होता, तो वे और पहले प्रयोग शुरू कर सकते थे.
देवव्रत ने तैयार किया एआई ब्रेन
देवव्रत की तकनीकी गतिविधियों में एक खास आकर्षण उनका तैयार किया गया AI ब्रेन भी है. उनके मुताबिक, इस सिस्टम को इस तरह विकसित किया गया है कि यह दुनिया की अलग-अलग भाषाओं में बातचीत कर सके. इसकी प्रोग्रामिंग और डेटा को सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर भी उन्होंने काम किया है. देवव्रत बताते हैं कि वे चाहते हैं कि सिस्टम में मौजूद जानकारी लंबे समय तक सुरक्षित रहे. यदि डिवाइस खराब हो जाए, तो उसकी कोडिंग के आधार पर दोबारा सिस्टम तैयार कर डेटा को दोबारा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सके. यह उनके लिए केवल एक तकनीकी मॉडल नहीं, बल्कि इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों में भी नई सोच के साथ प्रयोग किए जा सकते हैं.
नौकरी छोड़ी, लेकिन पिता से नहीं मांगे पैसे
देवव्रत अपनी आत्मनिर्भरता को भी अहम मानते हैं. उनका कहना है कि नौकरी छोड़ने के बाद से उन्होंने अपने पिता से एक रुपये की भी आर्थिक मदद नहीं मांगी. वे अपने प्रयासों से काम कर रहे हैं और अपनी कंपनी के जरिए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. स्टेम रोबो हब इंडिया के नाम का अर्थ बताते हुए वे कहते हैं कि STEM का मतलब साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स है. उनका उद्देश्य इन सभी क्षेत्रों को एक मंच पर लाना और भारत की पहचान तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में मजबूत करना है.
भारत को दुनिया में केवल तकनीक इस्तेमाल करने वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि नई तकनीक विकसित करने और दुनिया को ज्ञान देने वाले देश के रूप में भी पहचाना जाए-देवव्रत सिन्हा, युवा टेक्नोलॉजी इनोवेटर
"बचपन से मशीनों में थी दिलचस्पी"
देवव्रत के पिता चमन कुमार सिन्हा और माता बिमला सिन्हा बताते हैं कि उनका बेटा बचपन से ही मशीनों और तकनीकी चीजों में दिलचस्पी रखता था. वह छोटे-छोटे खिलौनों को खोलकर उनके भीतर क्या है, यह समझने की कोशिश करता था. आज वही रुचि रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीक पर काम करने तक पहुंच गई है. माता-पिता के मुताबिक, देवव्रत पढ़ाई में अच्छा रहा है. उसने किसी बड़े कॉलेज में जाकर विशेष प्रशिक्षण नहीं लिया, बल्कि घर पर रहकर खुद सीखने और प्रयोग करने का रास्ता चुना. वह क्या बना रहा है, इसकी जानकारी तो देता है, लेकिन उसके कई तकनीकी प्रयोग उन्हें भी पूरी तरह समझ नहीं आते. परिवार के लिए यह गर्व की बात है कि उनका बेटा अपनी मेहनत से कुछ नया करने की कोशिश कर रहा है.
कलेक्टर ने की सराहना, मगरलोड में रोबोटिक्स लैब की तैयारी
देवव्रत सिन्हा के प्रयासों को जिला प्रशासन का भी समर्थन मिल रहा है. धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने उनके काम की सराहना की है. कलेक्टर ने कहा कि मगरलोड के किसान परिवार से आने वाले देवव्रत रोबोटिक्स, IoT और AI जैसे क्षेत्रों में अच्छा काम कर रहे हैं. वे स्कूलों में जाकर बच्चों को 3D प्रिंटिंग और रोबोटिक्स की जानकारी दे रहे हैं. वे सरकारी स्कूलों में कैंप भी आयोजित कर चुके हैं. कलेक्टर ने बताया कि जिला प्रशासन देवव्रत के साथ मिलकर मगरलोड ब्लॉक में रोबोटिक्स लैब शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है. इसका उद्देश्य उन्नत तकनीक की शिक्षा को स्कूली बच्चों तक पहुंचाना और उन्हें नई संभावनाओं कराना है.
जिले में प्रतिभाशाली और जुनूनी युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन हरसंभव प्रयास करेगा. देवव्रत जैसे युवाओं के प्रयास दूसरे बच्चों को भी प्रेरित कर सकते हैं- अबिनाश मिश्रा, कलेक्टर, धमतरी
देवव्रत को गीता से मिलती है प्रेरणा
देवव्रत के काम करने की जगह पर एक पोस्टर भी लगा है, जिस पर लिखा है- "युद्ध करना तुम्हारा परम कर्तव्य है, पार्थ." वे बताते हैं कि भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को कर्तव्य का बोध कराने वाली सीख से उन्हें प्रेरणा मिलती है. जब कभी आलस आता है या काम करने का मन नहीं होता, तो उनकी नजर इस पंक्ति पर पड़ती है और वे दोबारा अपने काम में जुट जाते हैं. देवव्रत के लिए तकनीक सीखना और उस पर काम करना केवल करियर नहीं, बल्कि एक ऐसा लक्ष्य है, जिसके लिए वे लगातार मेहनत करना चाहते हैं.
एक देवव्रत नहीं, हजारों युवा तैयार करने का सपना
देवव्रत सिन्हा की कहानी केवल एक युवा इंजीनियर के नए प्रयोगों तक सीमित नहीं है. यह उस सोच की कहानी है, जिसमें अपनी सीखी हुई चीजों को दूसरों तक पहुंचाने और आने वाली पीढ़ी के लिए नए रास्ते खोलने की इच्छा है. वे चाहते हैं कि धमतरी का हर बच्चा आधुनिक तकनीक से परिचित हो, अपने सवालों के जवाब खुद खोजे और कुछ नया बनाने का साहस करे. उनका सपना है कि धमतरी से शुरू होने वाली यह पहल देशभर में पहुंचे और भारत तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में दुनिया को दिशा देने वाला देश बने.
मगरलोड के एक किसान परिवार से निकला यह युवा आज बच्चों के हाथों में केवल किताबें नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक से जुड़ने का अवसर देना चाहता है. अब देखना होगा कि उसके इस जुनून को स्कूलों, समाज और संस्थानों का कितना साथ मिलता है और धमतरी के कितने बच्चे इस राह पर आगे बढ़ते हैं.