मगरलोड अंचल में किसानों ने शुरू की हरहुना धान की कटाई


नवभारत रिपोर्टर । मगरलोड।

दशहरा पर्व के बाद क्षेत्र में खरीफ फसल की कटाई का सिलसिला शुरू हो गया है। शुरुआती दौर में हरहुना धान की कटाई की जा रही है। अरावली वैरायटी का हाइब्रिड हरहुना धान पककर तैयार हो चुका है। किसान अब हार्वेस्टर के माध्यम से फसल की कटाई करा रहे हैं। वहीं स्वर्ण, पान जमुना, सरना और महामाया सहित अन्य किस्मों के धान को पकने में अभी समय लगेगा। बढ़ेनी स्थित किसान एवं मगरलोड के पूर्व जनपद अध्यक्ष श्याम साहू के प्लांट में भी हार्वेस्टर से हरहुना धान की कटाई की जा रही है। हार्वेस्टर ठेकेदार चेतन साहू ने बताया कि फिलहाल कुछ किसानों के हरहुना धान की कटाई शुरू हुई है। अन्य किस्मों की फसल अभी पूरी तरह पककर तैयार नहीं हुई है। स्वर्ण धान को धान में पीलिया, पत्ती मोड़ और भूरा माहू के प्रकोप से किसान चिंतित पकने में लगभग एक महीने का समय और लग सकता है। वहीं सरना सहित अन्य किस्मों की कटाई के लिए किसानों को इंतजार करना पड़ेगा। 

राज्य शासन द्वारा15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू किए जाने की तैयारी है। इसे देखते हुए धान उपार्जन केंद्रों में भी समिति प्रबंधन आवश्यक व्यवस्थाएं जुटाने में एक ओर किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे हैं, तो दूसरी ओर धान की फसल में बीमारियों और कीटों के प्रकोप से उनकी चिंता बढ़ गई है। किसानों के अनुसार कई खेतों में पीलिया रोग, पत्ती मोड़ने वाले कीट, ब्लास्ट रोग और भूरा बीमारियों और कीट प्रकोप ने बढ़ाई किसानों की चिंता माहू की शिकायतें सामने आ रही हैं। 

फसल को नुकसान से बचाने के लिए किसानं कीटनाशक और अन्य कृषि दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि फसल इस समय पकने की स्थिति में है, ऐसे में बीमारी और कीटों का प्रकोप बढ़ने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को उम्मीद है कि समय पर उचित नियंत्रण और मौसम के अनुकूल रहने से फसल को अधिक नुकसान से बचाया जा सकेगा। अब किसानों की निगाहें धान की कटाई, वास्तविक उत्पादन और समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होने पर टिकी हैं।

लगा है। खेतों में फसल पकने के साथ ही किसान कटाई, मिंजाई और उपज को बेचने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में धान की अन्य किस्मों के पकने के साथ कटाई का काम भी तेजी पकड़ेगा। इस वर्ष अच्छी बारिश होने से किसानों को धान की बेहतर पैदावार की उम्मीद है।

पर्याप्त वर्षा के कारण फसल को पानी की कमी का सामना कम करना पड़ा है। किसानों को आशा है कि मौसम अनुकूल रहने पर उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि फसल की वास्तविक उपज कटाई और मिंजाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। 

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