धमतरी: मगरलोड के कुंडेल गांव में खेती से क्रांति: 24 एकड़ में केले की उन्नत खेती, गुजरात और एमपी तक हो रही सप्लाई, 100 से ज्यादा लोगों को मिला रोजगार

धमतरी, छत्तीसगढ़।
धमतरी जिले मगरलोड के कुंडेल गांव के प्रगतिशील किसान सुरेश कुमार नत्थानी ने खेती को सिर्फ गुजारा नहीं, बल्कि एक लाभदायक व्यवसाय बना दिया है। उन्होंने अपनी 24 एकड़ भूमि में से 14 एकड़ में टिशू कल्चर आधारित केले की खेती कर कृषि क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उनकी यह फसल न केवल छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर और धमतरी जैसे प्रमुख बाजारों में बिक रही है, बल्कि मध्यप्रदेश और गुजरात जैसे अन्य राज्यों में भी धूम मचा रही है।

प्रति एकड़ 20 टन उत्पादन, शुद्ध लाभ 1 से 1.5 लाख

सुरेश नत्थानी ने बताया कि टिशू कल्चर से तैयार केले के पौधों से उन्हें प्रति एकड़ करीब 20 टन तक उत्पादन मिल रहा है। पहले साल उन्हें प्रति एकड़ लगभग 1 लाख रुपए और दूसरे साल 1.5 लाख रुपए तक का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। चूंकि केले की फसल दो साल तक चलती है, इसलिए दूसरे साल पौधों की लागत नहीं आती, जिससे लाभ और बढ़ जाता है।
100 से ज्यादा लोगों को मिल रहा रोज़गार

खेती के इस सफल मॉडल से न सिर्फ सुरेश को आर्थिक मजबूती मिली है, बल्कि गांव के 100 से अधिक लोगों को भी रोज़गार का अवसर मिला है। आसपास के गांवों से रोज़ मजदूर सुरेश के खेत में काम करने आते हैं, जिससे उन्हें अपने घर के पास ही रोजगार मिल रहा है।
सब्जी उत्पादन और आधुनिक तकनीक का उपयोग

सिर्फ केले की खेती ही नहीं, सुरेश खीरा, लौकी, मिर्च और टमाटर जैसी सब्जियों की भी खेती कर रहे हैं। उन्होंने अपने खेत में ड्रिप इरिगेशन, पैक हाउस और उन्नत सिंचाई प्रणाली जैसे आधुनिक संसाधनों को अपनाया है। उनके खेत में लगी मशीन से आधे घंटे में पूरे खेत की सिंचाई हो जाती है, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होती है।
योजनाओं का लाभ उठाकर बना मिसाल

सुरेश ने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी अनुदानों का सही उपयोग कर खेती को लाभ का माध्यम बना दिया है। उनका साढ़े 3 लाख रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड भी बना है, जिससे उन्हें खेती के लिए ब्याज रहित ऋण मिल रहा है।

दूसरों के लिए प्रेरणा बने सुरेश

सुरेश नत्थानी की मेहनत और तकनीकी अपनाने की सोच ने उन्हें सिर्फ जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में एक पहचान दिलाई है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के किसान भी आधुनिक और व्यावसायिक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
सुरेश का संदेश:
"यदि इच्छा शक्ति हो और सरकार की योजनाओं का सही ढंग से उपयोग किया जाए, तो खेती एक लाभदायक व्यवसाय बन सकती है। इससे न सिर्फ आप अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं, बल्कि गांव के लोगों को भी रोजगार दे सकते हैं।"



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