लीवर की खामोश बीमारियाँ - गंभीर खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हेपेटाइटिस बी और सी दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। ये संक्रमण वर्षों तक बिना लक्षण के शरीर में बने रहते हैं और धीरे-धीरे लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे सिरोसिस, लीवर फेल्योर या लीवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
NHMMI के विशेषज्ञ डॉक्टर डॉ. अनुपम महापात्र एवं डॉ. अभिषेक जैन ने बताया कि ये संक्रमण मुख्य रूप से दूषित रक्त, असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाएं, संक्रमित सुई या रेज़र का उपयोग, असुरक्षित यौन संबंध और प्रसव के दौरान माँ से बच्चे में फैलते हैं।
लक्षणों को हल्के में लेना हो सकता है खतरनाक
हेपेटाइटिस बी और सी के लक्षण जैसे थकान, पीलिया, भूख न लगना, वजन घटना, गहरे रंग का पेशाब, उल्टी आदि अक्सर मामूली समझकर अनदेखे कर दिए जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत जाँच करवाना आवश्यक है।
जांच व टीकाकरण ही सुरक्षा का मार्ग
जहाँ हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए सुरक्षित व प्रभावी टीका उपलब्ध है, वहीं हेपेटाइटिस सी के लिए फिलहाल कोई टीका नहीं है, लेकिन इसका इलाज अब संभव है। डॉक्टरों ने बताया कि 2002 से पहले रक्त चढ़वाने वाले, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, गर्भवती महिलाएं, या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहने वाले लोगों को जांच जरूर करानी चाहिए।
जनजागरूकता शिविर: रायपुर में उम्मीद की किरण
एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल में आयोजित इस निशुल्क शिविर में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक बड़ी संख्या में लोग पहुँचे। शिविर में हेपेटाइटिस A, B और C के बारे में जानकारी दी गई और मरीजों को मुफ्त परामर्श प्रदान किया गया। डॉक्टर अनुपम महापात्र और डॉ. अभिषेक जैन ने मरीजों की जाँच की और सलाह दी।
इस अवसर पर डॉक्टरों ने यह भी बताया कि परामर्श शिविर में शामिल मरीजों को लीवर संबंधी जांचों पर 50% की विशेष छूट भी दी गई। यह पहल लोगों में समय पर जांच और उपचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
समाप्ति में संदेश
इस विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर, मेडिकल समुदाय और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया – "जाँच करवाएँ, टीकाकरण कराएँ, और लीवर को स्वस्थ बनाएँ।" समय रहते जागरूक होना न सिर्फ आपकी, बल्कि आपके अपनों की जिंदगी भी बचा सकता है।
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