धमतरी, मगरलोड- 23 दिसंबर 2025 धमतरी वन मंडल के उत्तर सिंगपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत वन विभाग की सतर्क गश्त और त्वरित कार्रवाई से तेंदुए के अवैध शिकार का मामला सामने आया है। 22 दिसंबर को ग्राम कोरगांव के एक चरवाहे ने कुएँ में तेंदुआ गिरने की सूचना दी थी। मौके पर पहुंचने पर कुएँ में तेंदुआ नहीं मिला, जिसके बाद वन अमले ने क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया।
तलाशी के दौरान आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 23, ग्राम कोरगांव (कनडबरा) क्षेत्र में एक तेंदुआ मृत अवस्था में पाया गया। गंभीरता को देखते हुए वन अपराध प्रकरण क्रमांक 14907/02 दिनांक 22.12.2025 दर्ज कर रात्रिकालीन जांच शुरू की गई। जांच में उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व के डॉग स्क्वाड की भी सहायता ली गई।
जांच के दौरान ग्राम कोरगांव निवासी गोवर्धन पटेल (35 वर्ष) के कब्जे से तेंदुए के पंजे/नाखून तथा अपराध में प्रयुक्त हथियार बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया है। उसके विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों से भी पूछताछ जारी है।
प्रथम दृष्टया तेंदुए की मृत्यु कुएँ में डूबने से होना प्रतीत होती है। तेंदुआ अनुसूची–I का संरक्षित वन्यप्राणी होने के कारण तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया है। आवश्यक नमूने फॉरेंसिक जांच हेतु जबलपुर प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर मृत्यु के वास्तविक कारण की पुष्टि की जाएगी।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यप्राणियों के संरक्षण को लेकर निगरानी और कानून का सख्त पालन जारी रहेगा तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
एक आरोपी गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण पंजीबद्ध कर रात्रिकालीन गहन जांच शुरू की गई। जांच में उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व की डॉग स्क्वाड की भी सहायता ली गई। जांच के दौरान ग्राम कोरगांव निवासी गोवर्धन पटेल, पिता आत्माराम पटेल (आयु 35 वर्ष) के कब्जे से तेंदुए के नाखून/पंजे तथा पंजे काटने में प्रयुक्त हथियार बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया। आरोपी के विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
इसके अलावा इस मामले में संलिप्तता की आशंका के चलते तीन अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेंदुए की मृत्यु का कारण कुएँ में डूबना प्रतीत हो रहा है। चूँकि तेंदुआ संरक्षित वन्यप्राणी है, इसलिए नियमानुसार तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल द्वारा शव परीक्षण कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद मृत तेंदुए के अवयव फॉरेंसिक जांच हेतु जबलपुर प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। फॉरेंसिक रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात ही तेंदुए की मृत्यु के वास्तविक कारण की पुष्टि हो सकेगी।


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