फिर पनीर मिलावटखोरी: डेढ़ साल में 15 हजार किलो नकली पनीर जब्त, 8 फैक्ट्रियां सील, कार्रवाई न होने से अधिकांश फिर बनाने लगीं पनीर

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फिर पनीर मिलावटखोरी: डेढ़ साल में 15 हजार किलो नकली पनीर जब्त, 8 फैक्ट्रियां सील, कार्रवाई न होने से अधिकांश फिर बनाने लगीं पनीर

राजधानी रायपुर में नकली पनीर का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की लगातार कार्रवाई के बावजूद मिलावटखोर नए ठिकानों पर फिर से उत्पादन शुरू कर दे रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में विभाग ने बिरगांव, उरला, धनेली, निमोरा और भाठागांव क्षेत्रों की 8 फैक्ट्रियों पर छापेमारी कर 15 हजार किलो से अधिक पनीर जब्त कर नष्ट कराया है। इसके बावजूद उन्हीं इलाकों में दोबारा गंदगी के बीच बड़े पैमाने पर नकली पनीर तैयार किया जा रहा है।

रविवार को विभाग की टीम ने भाठागांव और उरला स्थित फैक्ट्रियों में छापा मारकर सैंपल लिए और भारी मात्रा में पनीर नष्ट किया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन दोनों स्थानों पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। तीन महीने पहले भाठागांव की केएलपी डेयरी और उरला की एसजे डेयरी में छापे के दौरान नकली पनीर पकड़ा गया था, लेकिन अब फिर से वहां उत्पादन शुरू हो गया है।

मुनाफे के लालच में मिलावट

विशेषज्ञों के मुताबिक दूध पाउडर से बने पनीर में प्राकृतिक फैट नहीं होता। इसमें वेजिटेबल ऑयल,

खासकर नारियल तेल मिलाकर तैयार किया जाता है। इसे असली पनीर बताकर बेचना नियमों का उल्लंघन है। कारोबारियों को लेबल पर पूरी जानकारी देना अनिवार्य है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा। दूध पाउडर से बने 1 किलो पनीर पर 150 से 180 रुपए तक का मुनाफा मिल रहा है। यह पनीर 200-220 रुपए किलो तैयार होता है, लेकिन मिलावटखोर इसे शुद्ध पनीर बताकर 400-420 रुपए किलो तक बेच रहे हैं।

भास्कर टीम वहां पहुंची, जहां बन रहा था नकली पनीर

केडी कृष्णा डेयरी, मलसाय तालाब

डेढ़ साल में दो बार यहां पड़ चुका है छापा

सोमवार दोपहर 12 बजे भास्कर की टीम मलसाय तालाब स्थित केडी कृष्णा डेयरी पहुंची। यहां पनीर बनाने का काम चल रहा था। साथ ही पहले से तैयार पनीर की सप्लाई हो रही थी। सप्लाई के लिए मछली पैक करने वाले कार्टन का उपयोग किया गया था, जिस पर कोई लेबल नहीं था। यहां भीतर भारी मात्रा में गंदगी भी पसरी हुई थी।

सौरभ शर्मा, गोकुल नगर

सौरभ का माल रेलवे स्टेशन में पकडा गया था टीम दोपहर 2.30 बजे गोकुल नगर स्थित उस इलाके में पहुंची, जहां से सौरभ शर्मा पनीर की सप्लाई करता था। वहां पनीर के कुछ कार्टन अब भी रखे हुए थे। भीतर जाने पर पता चला, वह वहां से शिफ्ट होकर सेज बहार चला गया है, जहां उसने नई फैक्ट्री खड़ी कर दी है। अब वह पनीर बनाने का काम कर रहा है।

ऐसे करें नकली पनीर की पहचान

पनीर में आयोडीन डालने पर नीला हो जाए तो मिलावट है।

उबालने पर टूट जाए तो नकली है।

तलने पर ज्यादा तेल छोड़े तो भी मिलावटी है।

पनीर को दबाने पर अगर दानेदार नहीं है और रबर जैसा लग रहा है तो वह नकली है।

असली उबालने पर नहीं टूटता और तलने पर कम तेल छोड़ता है।

सीधी बात - दीपक अग्रवाल, नियंत्रक, खाद्य - औषधि प्रशासन विभाग

नकली पनीर का रैकेट चल रहा है, कार्रवाई क्यों नहीं? कार्रवाई लगातार कर रहे हैं। रविवार को भी बड़ी कार्रवाई कर पनीर नष्ट की है।

जहां पहले कार्रवाई हुई, वहीं दोबारा प्रोडक्शन शुरू हो जाता है, इस पर क्यों लगाम नहीं लग रही?

इन पर लाइसेंस निरस्तीकरण के लिए कहा गया है, लेकिन मामला कोर्ट में है, इसलिए आगे की कार्रवाई लंबित है। जहां दोबारा नकली पनीर बन रहा मुझे उसका नाम भेजिए, कार्रवाई करेंगे।

ऐसे पनीर से गंभीर खतरा

नकली पनीर से उल्टी, मतली, पाचन तंत्र की गड़बड़ी हो सकती है। इसमें नैनो प्लास्टिक होते हैं, जिससे कैंसर का भी खतरा हो सकता है। सैंपल की जांच रिपोर्ट से खतरनाक तत्वों की जानकारी मिलेगी।

- डॉ. मनोज लाहोटी, गेस्ट्रोलॉजिस्ट 

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