क्षेत्र में डीजल की किल्लत अब गंभीर रूप लेने लगी है। देवभोग और आसपास के सात से अधिक पेट्रोल पंपों पर डीजल स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन गई है। कई पंपों पर 'स्टॉक खत्म' की तख्तियां लगने के बाद वाहन चालकों, किसानों और मशीन संचालकों की चिंता बढ़ गई है।
रविवार से शुरू हुई इस समस्या के बीच भारत पेट्रोलियम के जगदंबा फ्यूल पंप पर ही सीमित मात्रा में डीजल उपलब्ध रहा, जिसके कारण यहां ग्राहकों की लंबी कतारें लग गईं। सोमवार रात करीब 10 बजे से ही लोग डीजल लेने पहुंचने लगे और भीड़ अगले दिन तक बनी रही। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पेट्रोल पंप प्रबंधन ने प्रति वाहन अधिकतम दो हजार रुपए तक ही डीजल देने की सीमा तय कर दी। सहायक खाद्य अधिकारी केतन राणा ने बताया कि डिपो से नियमित सप्लाई नहीं मिलने के कारण यह स्थिति बनी है।
अतिरिक्त मात्रा में डीजल ले जाने पर रोक लगाई गई है और जरूरत के अनुसार वितरण करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत करा दिया गया है। डीलरों को जल्द पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है, ताकि किल्लत और न बढ़े। किसानों ने बताया कि सुबह 10 बजे तक भी उनकी बारी नहीं आ सकी थी। शुरुआत में प्रशासन ने डब्बों में डीजल देने पर रोक लगा दी थी, जिससे कुछ देर हंगामे की स्थिति भी बनी। बाद में पुलिस की मौजूदगी में जरूरत के अनुसार सीमित मात्रा में डीजल वितरण शुरू किया गया।
ईधन संकट का असर खेती-किसानी पर डीजल संकट का असर खेती-किसानी पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खरीफ सीजन से पहले जुताई और खेत समतलीकरण में लगी कई ट्रैक्टर और फोकलेन मशीनें खेतों में ही खड़ी रहीं। वाहन मालिकों ने डीजल की व्यवस्था की जिम्मेदारी किसानों पर डाल दी है।
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